राज्यसभा में गूंजा उत्तराखंड के गांवों का मुद्दा, महेन्द्र भट्ट ने रखा ‘अपनी गणना–अपना गांव’ अभियान का प्रस्ताव
2027 की जनगणना को पलायन रोकने और सीमांत गांवों के पुनर्जीवन का आधार बनाने की पैरवी

नई दिल्ली। राज्यसभा सांसद एवं उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट ने शुक्रवार को राज्यसभा में उत्तराखंड के भविष्य, सीमांत गांवों और पलायन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से उठाते हुए वर्ष 2027 की जनगणना को “अपनी गणना–अपना गांव” जनभागीदारी अभियान के रूप में संचालित किए जाने का सुझाव दिया।उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना केवल जनसंख्या की गणना तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे उत्तराखंड के विकास, पलायन की वास्तविक स्थिति और सीमांत गांवों के संरक्षण का मजबूत आधार बनाया जाना चाहिए।

महेन्द्र भट्ट ने सदन के माध्यम से केंद्र सरकार से आग्रह किया कि प्रत्येक उत्तराखंडी का अपने मूल गांव से संबंध जनगणना में दर्ज किया जाए। इससे राज्य से हुए पलायन का वास्तविक आंकड़ा सामने आएगा और सरकार को ऐसी योजनाएं बनाने में सहायता मिलेगी, जिनका लाभ अंतिम छोर पर बसे गांवों तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के गांव केवल भौगोलिक इकाइयां नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और राष्ट्र की सुरक्षा की प्रथम पंक्ति हैं। सीमांत गांवों को जीवंत बनाए रखना राष्ट्रीय हित से जुड़ा विषय है और इसके लिए सरकार तथा समाज दोनों की समान भागीदारी आवश्यक है।
राज्यसभा में उठाए गए इस प्रस्ताव को उत्तराखंड के गांवों के पुनर्जीवन, पलायन की चुनौती से निपटने और सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
