October 9, 2026

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गंभीर बीमारी के बावजूद ट्रांसफर से अधिकारी की मौत मामले में हाईकोर्ट सख्त, सरकार और स्वास्थ्य महानिदेशक को नोटिस

स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रहे स्वर्गीय गिरधर सिंह बिष्ट के निधन मामले में हाईकोर्ट ने सरकार और स्वास्थ्य महानिदेशक को नोटिस दिया.

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और महानिदेशक (DG) चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को एक गंभीर मामले में नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने ये आदेश चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रहे स्वर्गीय गिरधर सिंह बिष्ट के भाई कुलदीप सिंह बिष्ट की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. याचिकाकर्ता का आरोप है कि अधिकारियों की संवेदनहीनता और अदालती आदेशों की अवहेलना के कारण उनके भाई की जान गई.

गौर हो कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और महानिदेशक (DG) चिकित्सा स्वास्थ्य को स्वर्गीय गिरधर सिंह बिष्ट के भाई कुलदीप सिंह बिष्ट की रिट याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है. याचिका के अनुसार, चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी रहे गिरधर सिंह ने उत्तराखंड स्थानांतरण अधिनियम, 2017 की धारा 3(d) के तहत गंभीर बीमारी के आधार पर याचिका दायर की थी, जिसमें राज्य मेडिकल बोर्ड द्वारा दिए गए अस्पष्ट चिकित्सा प्रमाण पत्र को चुनौंती दी गई थी.

इस पर उच्च न्यायालय ने 19 फरवरी 2026 को अधिकारियों को निर्देश दिया था कि गिरधर सिंह के उपस्थित होने के दो दिनों के भीतर पुनः उनकी स्वास्थ्य जांच की जाए. हालांकि, 28 फरवरी 2026 को उपस्थित होने के बावजूद नया प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया और 16 अप्रैल 2026 को बोर्ड ने फिर से अस्पष्ट प्रमाण पत्र जारी कर उसकी प्रति गिरधर सिंह को उपलब्ध नहीं कराई.

​अदालत के आदेशों की कथित अवहेलना करते हुए अधिकारियों ने 5 मई 2026 को गिरधर का पुनः स्थानांतरण कर दिया. इस मानसिक और शारीरिक तनाव के कारण गिरधर अंततः अचेत अवस्था (कोमा) में चले गए और उनका निधन हो गया. उनके निधन के बाद भाई कुलदीप सिंह बिष्ट ने सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से चिकित्सा प्रमाण पत्र प्राप्त किया और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया. याचिकाकर्ता का आरोप है कि यदि महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य और संबंधित अधिकारियों ने अदालती आदेशों का पालन करते हुए संवेदनशीलता दिखाई होती, तो उनके भाई को इस दुखद स्थिति का सामना न करना पड़ता. इस आधार पर उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच और सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है.

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