राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष : सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की गौरवगाथा”-डां.सुशील कोटनाला
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अर्थात् स्वयं के द्वारा निस्वार्थ भाव से राष्ट्र की सेवा करने वाले स्वयंसेवकों का संगठन।भारत में इस संगठन को 100 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं,ऐसा अद्भुत संगठन विश्व में दूसरा नहीं है जो भी एक बार इसके सम्पर्क में आया वह इसीका होकर रह गया। क्या हिन्दू,क्या मुस्लिम, क्या सिक्ख, क्या ईसाई? भारत के प्रति जिनमें भी अनन्य समर्पण और अगाध निष्ठा है वे सभी संघ के स्वयंसेवक हैं। मैं इसका अक्षि-साक्षी हूॅं, मैंने मुजफ्फर हुसैन जी को निकटता से देखा है, केरल के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक (ईसाई) जैकब थाॅमस, नैनीताल उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सरदार गजेन्द्र सिंह सहित अनेक कार्यकर्ता भारत के सर्वसमावेशी समाज (जो कि सुनिश्चित रूप से बहुसंख्यक हिन्दू समाज के कारण है)की अहर्निश सेवार्थ संघ को अपना योगदान देते रहे हैं।संघ विशिष्ट पूजा पद्धति के आधार पर धर्म का अंधानुकरण नहीं करता,वह हिन्दू सामाज के अनेक उपासना पद्धतियों के सम्मान का आदर करते हुए आस्तिक तथा नास्तिक वैचारिक स्वातंत्र्यता के आलोक में समस्त भारतीयों(जो निश्चित रूप से हिन्दू ही हैं, केवल आत्मविस्मृति के कारण अपना सम्बन्ध विदेशियों से जोड़ते हैं) का संगठन करता है वस्तुत: संघ हिन्दू (भारतीय) समाज में संगठन नहीं अपितु हिन्दू समाज का संगठन है।संघ का पंजीकरण न होना असंवैधानिक कदापि नहीं है। संघ का औपचारिक वैधानिक विधि सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के अन्तर्गत पंजीकरण होना आवश्यक नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत के संविधान के अन्तर्गत एक बाॅडी आफ इंडिविजुअल्स (व्यक्तियों का समूह) के रूप में कार्य करता है। भारत के संविधान का अनुच्छेद 19(1)(c) सभी नागरिकों को यह मौलिक अधिकार प्रदान करता है। इस अनुच्छेद के अन्तर्गत देश के नागरिक बिना किसी पूर्व अनिवार्य पंजीकरण के भी अपनी रुचि के वैचारिक, सामाजिक या सांस्कृतिक उद्देश्य के लिए समूह या संघ बना सकते हैं। भारत में प्रत्येक संगठन या संघ के लिए पंजीकरण करना अनिवार्य नहीं है। पंजीकरण प्रायः तब आवश्यक होता है जब कोई संस्था वैधानिक रूप से अचल संपत्ति क्रय करना चाहती है अथवा अनुबंध करना चाहती है या सरकार से कोई विशेष वित्तीय अनुदान या कर छूट (टैक्स लाभ) प्राप्त करना चाहती है। असंवैधानिक गतिविधियों के कारण संविधान के अनुच्छेद 19(4) के अन्तर्गत सरकार ऐसे किसी भी संगठन या समूह पर प्रतिबंध लगा सकती है।संघ की व्याप्ति भारतीय जन-मन में है और यह किसी भी राष्ट्र या संविधान विरोधी कार्य में संलग्न नहीं पाया गया है इसीलिए स्वतंत्रता के पश्चात राजनीतिक पूर्वाग्रहों के कारण लगाए गए तीन प्रतिबंध पूर्णतः निष्प्रभावी रहे हैं और संघ निरन्तर आगे ही बढ़ता जा रहा है ———
