मणिपुर में हिंसा: उग्रवादियों ने तीन मैतेई लोगों की हत्या की, CM बंगले के बाहर प्रदर्शन
मणिपुर में उग्रवादियों के हमले में तीन लोगों की मौत के बाद मैतेई समुदाय ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया.
इंफाल: मणिपुर में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. सोमवार को इंफाल ईस्ट के सागोलमांग क्षेत्र में सुनुरोक पहाड़ियों पर उग्रवादियों के हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जो मैतेई समुदाय से थे. इस हमले के बाद राज्य में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए. स्थानीय लोगों ने शवों को मुख्यमंत्री आवास के बाहर रखकर विरोध प्रदर्शन किया. बेकाबू प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े.
उग्रवादियों के हमले के बाद सुरक्षा बलों ने कांगपोकपी जिले की सुनुरोक पहाड़ियों में तलाशी अभियान शुरू किया. वहीं, मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा उपाय मजबूत करने का निर्देश दिया है.
उग्रवादी हमले में तीन लोगों की मौत के बाद विपक्षी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह के इस्तीफे की मांग की. सरकार की आलोचना करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया, “लगातार हत्याओं से लोग अनाथ जैसा महसूस कर रहे हैं.”
मणिपुर के ADGP ( कानून-व्यवस्था) लहरी दोरजी ल्हाटू ने कहा, “सोमवार सुबह करीब 9.40 बजे, अज्ञात उग्रवादियों ने 14 मैतेई ग्रामीणों के एक ग्रुप पर फायरिंग कर दी, जो जलाने की लकड़ी काटने और ले जाने का काम कर रहे थे.”
पुलिस अधिकारी ने कहा, “घटना में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए जिनका इलाज चल रहा है.”
एक अधिकारी ने बताया कि अरुबाम रोनिल (35) और लैरेनलकपम इनाओबी (51) की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि क्षेत्रीमयुम सुशील (32) ने एक प्राइवेट हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया. घायलों – एन सूरज (19), मेसनाम सोमेंद्रो (53) और के बोसान (45) का इलाज चल रहा है.
अधिकारी ने बताया कि वे उन 14 लोगों में शामिल थे जो सुबह करीब 7 बजे अपने गांव के पास पहाड़ियों पर जलाने की लकड़ी इकट्ठा करने गए थे और उग्रवादियों ने उन पर हमला कर दिया.
मई 2023 से मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष जारी है, जिसमें 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग लापता हैं. साथ ही, इस साल फरवरी से राज्य में कुकी और नागा लोगों के बीच झड़पों में लगभग 50 लोगों की मौत हो चुकी है.
सोमवार को हुई हत्याओं के बाद बड़ा विरोध हुआ, स्थानीय लोग शवों को राज्य की राजधानी इंफाल ले आए और उन्हें बाबूपारा में मुख्यमंत्री आवास के मेन गेट के बाहर रख दिया. स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए कई राउंड आंसू गैस के गोले छोड़े. बाद में शवों को जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) ले जाया गया. सीएम बंगले और वहां जाने वाले रास्तों के आसपास भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.
प्रदर्शनकारियों ने खुरई लामलोंग में एक सड़क को ब्लॉक कर दिया, जबकि महिलाओं के एक ग्रुप ने इंफाल के एमा कीथेल में प्रदर्शन किया. सोमवार को पूरे इंफाल में बाजार और दुकानें बंद रहीं.
स्पताल में घायलों से मिले मुख्यमंत्री खेमचंद
अपने आवास के बाहर प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री सिंह एक प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा रहे घायलों से मिलने गए, लेकिन उन्होंने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया.
बाद में उन्होंने राज्य में सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा करने के लिए एक बैठक की, जिसमें उन्होंने बेगुनाह लोगों की हत्या की कड़ी निंदा की और अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के उपाय मजबूत करने का निर्देश दिया.
समीक्षा बैठक में राज्य के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम, चीफ सेक्रेटरी, सिक्योरिटी एडवाइजर, पुलिस चीफ, कमिश्नर (गृह) और आर्मी, असम राइफल्स, CRPF, BSF और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए.
बाद में सिंह ने मुख्यमंत्री सेक्रेटेरिएट में NDA के विधायकों की एक बैठक की अध्यक्षता की.
