एलोरा की गुफाओं में छिपा है भारत की औदार्यता का सबसे बड़ा चैतन्य साक्ष्य: डॉ. सुशील कोटनाला
हिन्दू, बौद्ध,जैन तथा सिक्ख धर्म भारत की धरती से उत्पन्न चिन्तन के परिणाम हैं। दुर्भाग्य से आज हिन्दू और बौद्ध धर्म को लेकर भ्रम फैलाए जा रहे हैं, विशेष रूप से ‘बामसेफ’ इस भ्रम को अपनी कपोल-कल्पित अवधारणाओं से विमर्शात्मक वातावरण बनाकर इतिहास और पुरातत्व की उपेक्षा कर रहा है।एक असत्य को सौ बार बोलकर सत्य बना देने की कला बामसेफ के पास है यद्यपि वह इसमें सफल नहीं हो पा रहा है ……. हिन्दू राजाओं ने बौद्ध विहार खण्डित किए यह जोर-शोर से प्रचारित-प्रसारित किया जाता है, विशेष रूप से पुष्यमित्र शुंग के शासनकाल का उदाहरण देकर। सह्याद्रि पर्वत मालाएं एलोरा की गुफाओं के निर्माण से हिन्दू -बौद्ध -जैन के सुन्दर एकात्मकता के इतिहास का उद्घोष कर रही हैं।इनका निर्माण करने वाले राष्ट्रकूट, यादव,बादामी (चालुक्य),कलचुरी शासक हिन्दू धर्म का पालन करने वाले वाले थे।शैव और वैष्णव मतावलंबी होकर भी उन्होंने अद्भुत धार्मिक एकता और सद्भावना का परिचय दिया। 8वीं शताब्दी से 12वीं शताब्दी के मध्य इस समन्वय के ऐतिहासिक प्रमाण से तत्कालीन कालखण्ड में आद्य शंकराचार्य जी द्वारा बौद्धों के दमन की मनगढ़ंत कहानियों की हवा निकल जाती है।पूरे पश्चिमी जगत में प्राचीन यहूदी,परवर्ती ईसाई एवं इस्लाम के समन्वय के ऐसे ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाण नहीं मिलते हैं।……. भारत में एलोरा ही क्यों शुद्ध बौद्ध धर्म की अजन्ता की गुफाओं का निर्माण भी सातवाहन और वाकटक हिन्दू राजाओं द्वारा करवाया गया।कार्ला,भाजा, कन्हेरी,पाण्डवलेनी,पितलखोरा बौद्ध गुफाओं का निर्माण भी सातवाहन वंश के हिन्दू राजाओं द्वारा करवाया गया था।जबकी यहूदी, ईसाई और इस्लाम के अनुयायियों द्वारा परस्पर व्यापक नरसंहारों से इतिहास के पृष्ठ भरे पड़े हैं। मुस्लिम आक्रांताओं के अत्याचार से नालंदा विश्वविद्यालय का विनाश हुआ था,इस बौद्ध धर्म के सबसे बड़े विश्वविद्यालय का निर्माण भी गुप्त वंश के हिन्दू राजाओं द्वारा किया गया। गुप्त राजवंश हिन्दू धर्म की वैष्णव शाखा के अनुयाई थे किन्तु वे बौद्ध धर्म का भी पूरा सम्मान करते थे।यह समन्वय प्रवृत्ति हिन्दू धर्मावलंबियों के रोम-रोम में है। इजरायल आज भी असहिष्णुता का शिकार हो रहा है।मुट्ठी भर यहूदियों को मुस्लिम देश सहन नहीं कर पा रहे हैं।…… एलोरा की गुफाओं में तो हिन्दू धर्म और जैन -बौद्ध धर्म के समन्वय के पुरातात्विक प्रमाण भारत की औदार्यता का सबसे चैतन्य साक्ष्य है ….. बामसेफ के मेरे सम्मानित मित्रों से विनम्र निवेदन है कि वे इन प्रमाणों की उपेक्षा कदापि न करें और भारत की भारतीयता से बहुत दूर खड़े वामपंथी मित्रों को भी भ्रमपूर्ण इतिहास लेखन से बचना चाहिए —–
