गैरसैंण विधानसभा सत्र में उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों पर ठोस कानून बनाए सरकार : डी.के. पाल
राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण से लेकर 4600 ग्रेड-पे, युवाओं को 70% रोजगार और मलिन बस्तियों के मालिकाना हक तक उठाई आवाज
देहरादून। महासंघ इंटक के प्रदेश महासचिव (संगठन) डी.के. पाल ने उत्तराखंड सरकार से मांग की है कि गैरसैंण में आयोजित होने वाले विधानसभा सत्र को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि राज्य के वर्षों से लंबित जनहित के मुद्दों पर ठोस, निर्णायक और समयबद्ध फैसले लिए जाएं। उन्होंने कहा कि गैरसैंण विधानसभा सत्र प्रदेश की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने और राज्य आंदोलन की मूल भावना के अनुरूप निर्णय लेने का महत्वपूर्ण अवसर है।
डी.के. पाल ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का गठन जिन संघर्षों, त्याग और बलिदानों के परिणामस्वरूप हुआ, उन सपनों को साकार करना सरकार की जिम्मेदारी है। राज्य आंदोलनकारियों के लंबित चिन्हीकरण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर सभी पात्र आंदोलनकारियों को उनका अधिकार, सम्मान और न्याय मिलना चाहिए।
आठ प्रमुख जनहित के मुद्दों पर सरकार से ठोस निर्णय लेने की मांग
1. उत्तराखंड की परिसंपत्तियों पर राज्य का अधिकार सुनिश्चित हो
डी.के. पाल ने कहा कि राज्य गठन के बाद से लंबित परिसंपत्ति संबंधी मामलों का स्थायी समाधान किया जाए। उत्तराखंड के हिस्से की परिसंपत्तियों और अधिकारों को प्राप्त करने के लिए सरकार आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक कदम उठाए, ताकि राज्य के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
2. कानून-व्यवस्था मजबूत हो, महंगाई पर लगे लगाम
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के साथ आम जनता को बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत मिल सके।
3. अंकिता भंडारी प्रकरण पर श्वेत पत्र जारी करे सरकार
डी.के. पाल ने अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि मामले में अब तक हुई जांच और कार्रवाई की स्थिति प्रदेश की जनता के सामने स्पष्ट की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि संबंधित जांच एवं कानूनी कार्यवाही की अद्यतन स्थिति सार्वजनिक करने के लिए श्वेत पत्र जारी किया जाए। यदि कोई जांच या प्रक्रिया लंबित है, तो उसकी स्थिति स्पष्ट करते हुए न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
4. शिक्षा व्यवस्था में सुधार, फीस और पेपर लीक पर कठोर कानून बने
उन्होंने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कानून बनाया जाए। प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधानों तथा पारदर्शी परीक्षा प्रणाली को प्रभावी बनाया जाए। साथ ही, स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और लापरवाही की स्थिति में जवाबदेही तय करने के लिए भी सख्त व्यवस्था लागू हो।
5. मलिन बस्तियों के पात्र परिवारों को मिले मालिकाना हक
डी.के. पाल ने कहा कि मलिन बस्तियों में वर्षों से निवास कर रहे गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के आवासीय भविष्य को सुरक्षित करना आवश्यक है। सरकार पात्र परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक विधेयक लाए और ऐसा स्थायी कानूनी समाधान तैयार करे, जिससे नियमानुसार उनके आवास एवं भूमि पर मालिकाना अधिकार देने का रास्ता साफ हो सके।
6. पुलिस कर्मियों की 4600 ग्रेड-पे की मांग पर हो फैसला
उन्होंने उत्तराखंड पुलिस कर्मियों की लंबे समय से लंबित 4600 ग्रेड-पे की मांग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पुलिस के जवान दिन-रात प्रदेश की कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनी सेवाएं देते हैं। ऐसे में उनकी लंबित मांग पर सरकार को स्पष्ट और ठोस निर्णय लेना चाहिए। डी.के. पाल ने मांग की कि विधानसभा सत्र में इस विषय का समाधान निकालकर पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों को दीपावली का तोहफा दिया जाए।
7. सरकारी भर्तियां शुरू हों, निजी क्षेत्र में 70 प्रतिशत रोजगार स्थानीय युवाओं को मिले
डी.के. पाल ने कहा कि बेरोजगारी प्रदेश के युवाओं के सामने गंभीर चुनौती बनी हुई है। सरकार सभी विभागों में रिक्त पदों का विभागवार विवरण सार्वजनिक करे और भर्ती कैलेंडर जारी कर समयबद्ध तरीके से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे।
उन्होंने यह भी मांग की कि प्रदेश में स्थापित उद्योगों एवं निजी क्षेत्र में उत्तराखंड के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने तथा 70 प्रतिशत रोजगार सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कानूनी एवं नीतिगत व्यवस्था बनाई जाए। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और उन्हें नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने की मजबूरी कम होगी।
8. सिमली औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग स्थापित कर रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं
उन्होंने कहा कि सिमली औद्योगिक क्षेत्र को वास्तविक औद्योगिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए सरकार विशेष कार्ययोजना तैयार करे। उद्योगों की स्थापना में आने वाली बुनियादी, प्रशासनिक और अन्य व्यावहारिक बाधाओं को दूर किया जाए तथा उद्यमियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
डी.के. पाल ने कहा कि सिमली औद्योगिक क्षेत्र का प्रभावी विकास पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार बढ़ाने, युवाओं के पलायन को कम करने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
केवल आश्वासन नहीं, विधेयक और समयबद्ध कार्ययोजना चाहिए
डी.के. पाल ने कहा कि उत्तराखंड केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष, शहादत और लाखों प्रदेशवासियों की उम्मीदों का प्रतीक है। सरकार को आंदोलनकारियों को सम्मान, युवाओं को रोजगार, पुलिस कर्मियों को उनके अधिकार, महिलाओं को सुरक्षा एवं न्याय, बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शिक्षा तथा गरीब परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि गैरसैंण विधानसभा सत्र में इन मुद्दों पर केवल आश्वासन देने के बजाय सरकार विधेयकों, शासनादेशों और समयबद्ध कार्ययोजनाओं के माध्यम से निर्णय ले। प्रत्येक प्रमुख मांग के समाधान की समयसीमा भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि प्रदेश की जनता को यह स्पष्ट हो सके कि लंबित समस्याओं का निस्तारण कब तक होगा।
जनहित के मुद्दों पर आंदोलन की चेतावनी
डी.के. पाल ने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों को फिर से लंबित रखा गया और जनसमस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई, तो प्रदेश की जनता, बेरोजगार युवाओं, कर्मचारियों, राज्य आंदोलनकारियों और गरीब परिवारों के हितों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन करने पर विचार किया जाएगा।
उन्होंने सरकार से अपील की कि गैरसैंण विधानसभा सत्र को जनभावनाओं का सम्मान करने और उत्तराखंड के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान का अवसर बनाया जाए।
