September 12, 2026

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उत्तराखण्ड में पांच लाख तक इनकम वाले परिवारों का आशियाने का सपना होगा पूरा, सरकार ने की खास प्‍लानिंग

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में विकास प्राधिकरण अब स्थानीय वास्तुशैली बाखली (रो-हाउसिंग) में आवासीय परियोजनाएं बनाने को प्राथमिकता देंगे। राज्य की नई आवास नीति के आलोक में शासन द्वारा जारी की गई आवास विकास नियमावली में यह प्रविधान किया गया है। बाखली शैली की आवासीय इकाइयों के निर्माण के दृष्टिगत लाभार्थियों व विकासकर्ताओं को कई छूट भी दी गई हैं। इसके अलावा नियमावली में यह भी प्रविधान किया गया है कि अब पांच लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले परिवारों का घर का सपना भी पूरा हो सकेगा। यही नहीं, पहली बार निम्न और निम्न मध्यम वर्ग के लिए भी आय सीमा निर्धारित की गई है।

कैबिनेट बैठक में आवास नीति को दी गई थी स्‍वीकृति
धामी कैबिनेट की पिछले वर्ष 11 दिसंबर को हुई बैठक में राज्य की नई आवास नीति को स्वीकृति दी गई थी। अब इसे धरातल पर मूर्त रूप देने के लिए प्रमुख सचिव आवास आर मीनाक्षी सुंदरम की ओर से आवास विकास नियमावली जारी कर दी गई है। विकास प्राधिकरण इसके अनुसार ही आवासीय परियोजनाओं को मूर्त रूप देंगे। इसमें पर्वतीय क्षेत्र में कमजोर आय वर्ग के लिए बाखली शैली में आवासीय परियोजना में कम से कम 10 इकाइयां होंगी। इसमें प्रत्येक आवासीय भूखंड के अग्र सेटबैक में खुली सीढिय़ां और न्यूनतम दो मीटर चौड़ा सामूहिक आंगन बनाना अनिवार्य होगा।

क्या है बाखली शैली
पर्वतीय क्षेत्र के अधिकांश गांवों में दोनों तरफ घर सीधी रेखा में बनाए जाते हैं।
बीच में खुला सामूहिक आंगन होता है।
इसे ही बाखली शैली कहते है।
आवासीय परियोजना के बाखली शैली में बनने से वहां पानी, बिजली समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में आसानी रहेगी।
नियमावली के मुख्य बिंदु
पर्वतीय क्षेत्र में न्यूनतम दो और मैदानी क्षेत्र में 10 हेक्टेयर में आकार लेंगे आवासीय प्रोजेक्ट।
कमजोर आय वर्ग के लिए निर्धारित वार्षिक आय सीमा अब पांच लाख।
प्रधानमंत्री आवास योजना नियमावली के अनुरूप बनी आवास नियमावली।
ईडब्लूएस, एआइजी, एलएमआइजी के लिए बुकिंग, पंजीकरण की राशि तय, ईडब्लूएस को स्टांप शुल्क में छूट।
महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देते हुए आवास आवंटन में परिवार की महिला सदस्य को प्राथमिकता।
विकासकर्ताओं की मनमानी रोकने को किफायती आवास श्रेणी में आवास के साथ प्रति वर्ग मीटर कारपेट एरिया की अधिकतम दर तय।
आवासीय परियोजना में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की अनिवार्यता।
किफायती आवास में पहली बार औद्योगिक परियोजनाओं की भांति नीतिगत व वित्तीय प्रोत्साहन।
भू उपयेाग परिवर्तन का सरलीकरण, मानचित्र स्वीकृति में छूट, भूमि क्रय करने केा विकासकर्ता को भी स्टांप शुल्क में छूट।
एसटीपी निर्माण और उसके संचालन के उपरांत प्रतिपूर्ति की व्यवस्था, एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति।
आवासीय परियोजनाओं में व्यावसायिक एफएआर मैदानी क्षेत्र में के लिए अधिकतम 25 व पर्वतीय क्षेत्र के लिए 30 प्रतिशत।
किफायती आवास श्रेणी में गाउंड फ्लोर सहित तीन मंजिला के प्रतिबंध को हटाते हुए लिफ्ट की व्यवस्था के साथ अनुमन्य ऊंचाई तक अपार्टमेंट का निर्माण।