राजनीति के इस वृद्ध में आज भी भीष्म क्षमताएं
मैं श्रद्धेय प्रधानमंत्री जी के सकारात्मक पक्ष पर गहन चिंतन करता हूॅं तो पाता हूॅं कि विगत 12वर्षों से भारत में अनेक ऐसे परिवर्तन हुए हैं कि जो मोदी युग को ऐतिहासिक सिद्ध करते हैं,यद्यपि कतिपय प्रायोजित दुर्घटनाओं को विरोधी नकारात्मक प्रतिक्रिया द्वारा जनता को भ्रमित करने में सफल होना चाहते हैं पर हो नहीं पा रहे हैं।न केवल राममंदिर निर्माण अपितु कश्मीर से धारा 370 को हटाना, अनेक राज्यों में समान नागरिक संहिता का क्रियान्वयन,असम तथा पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों पर अंकुश के सार्थक प्रयास, प्रमुख तीर्थों का सौंदर्यीकरण, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर यथासंभव नियंत्रण, अनेक विमान पत्तनों का निर्माण,2027 तक 08 बुलेट मार्गों पर बुलेट ट्रेनों के संचालन की तैयारी, हरियाणा में प्रदूषण-मुक्त 35 हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन, राजमार्गों का व्यापक विस्तार, वैश्विक संकट के समय पड़ोसी देशों की अपेक्षा पेट्रोल तथा गैस के नियंत्रित मूल्य, बाजार मूल्यों पर वैश्विक आर्थिक मंदी में भी अपेक्षाकृत नियंत्रण, पूर्वोत्तर भारत के विकास के सार्थक प्रयास तथा पूर्वोत्तर से आतंकवाद का उन्मूलन (मणिपुर की हिंसा को रोकने के भी यथासंभव प्रयास), स्वदेशी प्रक्षेपास्त्र तथा आयुधों का निर्माण एवम् व्यापार,इसरो से अनेक अचम्भित करने वाली स्वदेशी तकनीक द्वारा अंतरिक्षीय गतिविधियों का संचालन,नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन, आयुष्मान कार्ड से निशुल्क उपचार, निशुल्क राशन वितरण,सेना का सशस्त्रीकरण और आधुनिकीकरण की दिशा में प्रयास सहित अनेक लोककल्याणकारी कार्यक्रमों से भारत की विश्व में सशक्त उपस्थिति अंकित की है जिससे चिढ़ कर ईर्ष्यावश अनेक विदेशी शक्तियों द्वारा परोक्ष आक्रमणों से भारत को नेपाल, पाकिस्तान,बांग्लादेश तथा श्रीलंका जैसी अस्थिरता के प्रयास जारी हैं यद्यपि कतिपय मानवीय त्रुटियां,भूलें और दुर्बलताएं हो सकती हैं किन्तु सशक्त नेतृत्व और अहर्निश कर्म करते रहने की कोरोनाकाल वाली क्षमताएं राजनीति के इस वृद्ध भीष्म में अब तक भी विद्यमान है——
लेखक: डाo सुशील कोटनाला,उत्तराखंड भारत।
(यह लेखक के अपने विचार हैं–)
