हरक हीं नहीं पूरी कांग्रेस पार्टी पर पड़ेगा फरक,अब डगर नहीं आसान
24 साल पुराने जेनी प्रकरण की फिर खुली फाइल, हरक सिंह रावत पर आरोपों से उत्तराखंड की सियासत में हलचल
जेनी के नए खुलासों ने कांग्रेस की बढ़ाई मुश्किलें, पुराने विवाद ने लिया नया राजनीतिक मोड़
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर करीब 24 साल पुराना जेनी प्रकरण सुर्खियों में आ गया है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर जहां सत्ताधारी भाजपा मोदी शाह के मार्गदर्शन में तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में अबकी बार 60 पार के नारे के साथ तीसरी बार मैदान मारने को मैदान में उतरेगी तो वहीं दूसरी ओर फिर से जेनी जिन्न के कारण अबकी बार हरक हीं नहीं पूरी कांग्रेस पार्टी पर इसका पड़ेगा फरक,अब डगर आसान नहीं है।
असम की रहने वाली जेनी द्वारा हाल ही में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत पर लगाए गए गंभीर आरोपों ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। इस घटनाक्रम ने न केवल हरक सिंह रावत को सवालों के घेरे में ला दिया है, बल्कि कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और आगामी चुनावी तैयारियों पर भी चर्चा तेज कर दी है।
जेनी ने अपने ताजा बयान में हरक सिंह रावत पर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कथित तौर पर मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने, डराने-धमकाने, प्रदेश से बाहर जाने के लिए मजबूर करने तथा डीएनए जांच की प्रक्रिया में उनके बेटे का सैंपल नहीं लिए जाने जैसे कई सवाल उठाए हैं। इन आरोपों ने करीब दो दशक पुराने विवाद को एक बार फिर सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।

गौरतलब है कि वर्ष 2002 के आसपास सामने आए इस प्रकरण ने उस समय उत्तराखंड की राजनीति में काफी हलचल मचाई थी और हरक सिंह रावत को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब इतने वर्षों बाद जेनी के दोबारा सामने आने और सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने से मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है।
दूसरी ओर, हरक सिंह रावत ने जेनी द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें राजनीतिक साजिश और प्रायोजित प्रयास बताया है। उन्होंने अपने पक्ष में कई तर्क प्रस्तुत करते हुए आरोपों को गलत साबित करने की बात कही है। हालांकि, दोनों पक्षों के दावों के बीच इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यों की सार्वजनिक स्पष्टता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस घटनाक्रम को केवल एक पुराने विवाद की वापसी के रूप में नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर चल रही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और नेतृत्व की दावेदारी के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। कांग्रेस में वापसी के बाद हरक सिंह रावत लगातार सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश में रहे हैं। ऐसे में यह विवाद उनके राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ पार्टी की छवि को भी प्रभावित कर सकता है।
आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच यह मामला भाजपा को कांग्रेस पर राजनीतिक हमला करने का अवसर दे सकता है। वहीं कांग्रेस के सामने अपने वरिष्ठ नेता का बचाव करने और पूरे प्रकरण पर स्पष्ट राजनीतिक रुख अपनाने की चुनौती होगी।
फिलहाल जेनी के आरोपों और हरक सिंह रावत के जवाब के बीच उत्तराखंड की राजनीति में चर्चाओं का दौर गर्म है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या इसकी निष्पक्ष जांच के जरिए नए तथ्य सामने आते हैं।
