October 28, 2026

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गुलाबी ठंड-कम भीड़ में लें उत्तराखंड घूमने का मजा, जानें चारधाम से कैंची मंदिर घूमने में लगेंगे कितने दिन, कितना खर्चा

चारधाम यात्रा अपने अंतिम चरण में है, ऐसे में यात्रा की योजना बनाने वालों के लिए सुनहरा मौका है, रिपोर्ट- किरणकांत शर्मा

देहरादून: उत्तराखंड की वादियों में मौसम ने करवट लेनी शुरू कर दी है. ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और बारिश के बाद ठंड बढ़ गई है. पहाड़ों पर हल्की सफेद बर्फ की चादर, बादलों से ढकी चोटियां, देवदार के घने जंगल और मंदिरों में गूंजती घंटियां पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं.

उत्तराखंड घूमने के लिए शानदार मौसम: अगर आप भी रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर कुछ दिन पहाड़ों के बीच बिताना चाहते हैं. धार्मिक स्थलों के दर्शन करना चाहते हैं और प्रकृति की खूबसूरती का आनंद लेना चाहते हैं, तो इस मौसम में उत्तराखंड की यात्रा आपके लिए यादगार हो सकती है. अब चारधाम यात्रा अपने अंतिम चरण में है. ऐसे में यात्रा की योजना बनाने वालों को कुछ स्थानों पर कम भीड़ का फायदा मिल सकता है.

हल्की गुलाबी ठंड और मंदिरों के साथ प्राकृतिक पर्यटन: उत्तराखंड की खासियत यह है कि यहां आपको एक ही यात्रा में धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़ी खानपान और ऐतिहासिक धरोहरों का अनुभव मिल सकता है. एक तरफ केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे विश्व प्रसिद्ध धाम हैं, तो दूसरी तरफ नैनीताल की झीलें, कैंची धाम का आध्यात्मिक वातावरण और अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम में प्राचीन मंदिरों मे भगवान भोलेनाथ के दर्शन होंगे. अगर आपके पास केवल तीन दिन हैं, तो भी आप एक छोटा धार्मिक और प्राकृतिक टूर प्लान कर सकते हैं. वहीं पांच से छह दिन की छुट्टी मिलने पर कैंची धाम, नैनीताल, अल्मोड़ा और जागेश्वर को एक साथ घूमने का विकल्प भी मौजूद है. कैसे प्लान कर सकते हैं आप अपनी यात्रा को चलिए बताते हैं.

चारधाम यात्रा दर्शन का प्लान: उत्तराखंड के चारधाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ हर साल देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं पहुंचते हैं. चारधाम यात्रा अप्रैल या मई से शुरू होकर अक्टूबर या नवंबर तक चलती है. सर्दी बढ़ने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने के कारण मंदिरों के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं. इसलिए अक्टूबर के आखिरी दिनों या नवंबर में चारधाम की शुरुआत में यात्रा करने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को सबसे पहले संबंधित मंदिरों के कपाट बंद होने की तारीख जरूर जान लेनी चाहिए, तभी घर से निकलें.

उत्तराखंड टूर ऐसे करें प्लान: चारधाम की पूरी यात्रा के लिए हरिद्वार या ऋषिकेश से लगभग 10 से 12 दिन रखना बेहतर रहेगा. दिल्ली-एनसीआर से आने-जाने का समय जोड़ने पर 11 से 13 दिन का कार्यक्रम सुविधाजनक होगा. यात्रा की शुरुआत हरिद्वार या ऋषिकेश से करते हुए बड़कोट और यमुनोत्री, फिर उत्तरकाशी और गंगोत्री, इसके बाद गुप्तकाशी या सोनप्रयाग होते हुए केदारनाथ और अंत में जोशीमठ तथा बदरीनाथ का कार्यक्रम बनाया जा सकता है. रास्ते में पहाड़ी बाजारों, नदी घाटियों और प्राकृतिक नजारों का आनंद लेने के लिए पर्याप्त समय रखें. यमुनोत्री और केदारनाथ में पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है. इसलिए बुजुर्गों, बच्चों और शारीरिक रूप से कमजोर यात्रियों को अपनी क्षमता के अनुसार यात्रा की योजना बनाएं.

कितना आएएगा खर्च: ऋषिकेश में टूर पैकेज और ट्रैवल का काम करने वाले विजय बिष्ट कहते हैं कि-

चारधाम यात्रा का खर्च आपके परिवहन, होटल और खाने-पीने की व्यवस्था पर निर्भर करेगा. अगर आप दिल्ली-एनसीआर से बस या ट्रेन द्वारा हरिद्वार पहुंचते हैं. वहां से साझा टैक्सी या दूसरे साझा वाहनों का इस्तेमाल करते हैं और सामान्य होटल या गेस्टहाउस में रुकते हैं, तो लगभग 11 से 13 दिन के पूरे कार्यक्रम के लिए प्रति व्यक्ति 25,000 से 40,000 रुपये का शुरुआती बजट रखा जा सकता है. इसमें आने-जाने का किराया, स्थानीय परिवहन, ठहरने, भोजन और सामान्य अन्य खर्च शामिल करने का अनुमान है.
-विजय बिष्ट, टूर पैकेज और ट्रैवल ऑपरेटर-

विजय कहते हैं कि यदि आप निजी टैक्सी से यात्रा करते हैं. बेहतर होटल चुनते हैं या केदारनाथ के लिए हेलीकॉप्टर जैसी अतिरिक्त सेवाएं लेते हैं, तो खर्च काफी बढ़ जाता है. इस मौसम में सबसे बेहतर ये रहेगा कि आपको भीड़ बेहद कम मिलेगी. अधिक लंबी लाइन नहीं और आराम से दर्शन हो जाएंगे.

कैंची धाम बाबा नीम करौली के दर्शन और नैनीताल की वादियों का आनंद: अगर आप लंबी छुट्टी नहीं ले सकते लेकिन उत्तराखंड के धार्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करना चाहते हैं, तो कैंची धाम आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. नैनीताल के पास स्थित बाबा नीम करौली महाराज का यह आश्रम देशभर के श्रद्धालुओं की बड़ी पसंद बन गया है. यहां दर्शन के लिए आने वाले लोग अक्सर नैनीताल, भवाली और आसपास की झीलों को भी अपनी यात्रा में शामिल करते हैं. सुबह के समय पहाड़ों पर छाई धुंध, ठंडी हवा और शांत वातावरण इस यात्रा को खास बना सकते हैं.

दिल्ली-एनसीआर से कैंची धाम और नैनीताल घूमने के लिए तीन दिन और दो रातों का कार्यक्रम बनाते हैं, तो बेहतर रहेगा. पहले दिन काठगोदाम पहुंचकर भवाली या नैनीताल में ठहरें. दूसरे दिन सुबह कैंची धाम में दर्शन करें और इसके बाद नैनीताल की नैनी झील, माल रोड और नैना देवी मंदिर घूम सकते हैं. अगर समय बचता है, तो शाम को झील के आसपास बैठकर पहाड़ों की ठंडी हवा का आनंद लें. तीसरे दिन भीमताल या सातताल घूमकर वापसी की यात्रा शुरू की जा सकती है. यदि आप मुक्तेश्वर भी जाना चाहते हैं, तो चार दिन और तीन रातों का कार्यक्रम बनाना अधिक सही रहेगा. मुक्तेश्वर में मंदिर के दर्शन और आसपास के हिमालयी दृश्यों का आनंद लिया जा सकता है.

कितना खर्च आएगा? इस पूरे तीन दिन के कैंची धाम और नैनीताल टूर पर प्रति व्यक्ति लगभग 5,000 से 12,000 रुपये खर्च हो सकते हैं. इसमें दिल्ली से ट्रेन या बस द्वारा आने-जाने, दो रातों के साधारण होटल या होमस्टे, भोजन और स्थानीय घूमने के लिए साझा परिवहन का अनुमान शामिल है. अगर आप परिवार के साथ निजी कार लेकर जाते हैं, तो वाहन का कुल खर्च यात्रियों के बीच बांटने से प्रति व्यक्ति लागत कम हो सकती है. वहीं अलग-अलग टैक्सी, बेहतर होटल या रिसॉर्ट लेने पर खर्च बढ़ जाएगा.

नैनीताल-भीमताल में ये हैं आकर्षण: नैनीताल में नौकायन और दूसरी गतिविधियों के लिए भी कुछ अतिरिक्त रकम रखना बेहतर है. अगर मुक्तेश्वर को भी यात्रा में शामिल करते हैं, तो होटल और स्थानीय परिवहन के लिए बजट थोड़ा बढ़ाना होगा. कैंची धाम के आसपास घूमने के लिए कई खूबसूरत विकल्प हैं. नैनीताल में नैनी झील, माल रोड और नैना देवी मंदिर, भीमताल अपनी शांत झील क्षेत्र के लिए जाना जाता है. सातताल जंगलों से घिरी झील और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव देता है. अगर आप भीड़ से दूर पहाड़ों के बीच कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो मुक्तेश्वर को भी कार्यक्रम में शामिल कर सकते हैं. इन सभी जगहों को एक ही दिन में देखने की कोशिश करने के बजाय दो से तीन दिनों में बांटने से यात्रा ज्यादा आरामदायक होगी.

जागेश्वर धाम देवदार के जंगलों में बसे प्राचीन मंदिरों के दर्शन: उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित जागेश्वर धाम उन लोगों के लिए खास है, जो धार्मिक यात्रा के साथ इतिहास और प्रकृति का अनुभव भी करना चाहते हैं. अल्मोड़ा जिले में स्थित यह प्राचीन मंदिर समूह भगवान शिव को समर्पित है. यहां पत्थरों से बने अनेक प्राचीन मंदिर पारंपरिक कला और देवदार के ऊंचे पेड़ मिलकर एक अलग ही वातावरण बनाते हैं. जागेश्वर धाम में दर्शन करने के बाद ऐसा महसूस होता है जैसे पहाड़ों की शांति के बीच समय कुछ देर के लिए ठहर गया हो.

अगर आप भीड़-भाड़ वाले पर्यटन स्थलों से अलग किसी शांत धार्मिक स्थल की तलाश में हैं तो जागेश्वर धाम को अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं. जागेश्वर धाम घूमने के लिए तीन दिन और दो रातों का कार्यक्रम बनाया जा सकता है. पहले दिन काठगोदाम पहुंचकर अल्मोड़ा या आसपास के किसी गांव में ठहरें. दूसरे दिन जागेश्वर धाम में दर्शन करें. समय मिलने पर वृद्ध जागेश्वर भी जाएं. तीसरे दिन अल्मोड़ा के आसपास के दर्शनीय स्थल देखने के बाद वापसी की यात्रा शुरू कर सकते हैं. यदि आपके पास एक और दिन है तो कसार देवी और चितई गोलू देवता मंदिर को भी कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है.

कितना खर्च आएगा: दिल्ली-एनसीआर से जागेश्वर धाम की तीन दिन की यात्रा के लिए प्रति व्यक्ति लगभग 5,000 से 12,000 रुपये का बजट रखा जा सकता है. इसमें आने-जाने का किराया, दो रातों का सामान्य होटल या होमस्टे, भोजन और स्थानीय परिवहन का अनुमान शामिल है.

ट्रेन से काठगोदाम पहुंचने के बाद आगे बस या टैक्सी से अल्मोड़ा और जागेश्वर पहुंचा जा सकता है. यदि आप निजी टैक्सी लेकर सभी मंदिरों और आसपास के स्थानों पर घूमना चाहते हैं, तो खर्च बढ़ सकता है. जागेश्वर धाम के आसपास घूमने के लिए अल्मोड़ा शहर, चितई गोलू देवता मंदिर, कसार देवी, बिनसर और वृद्ध जागेश्वर अच्छे स्थान हैं. अल्मोड़ा में स्थानीय बाजारों और कुमाऊंनी खानपान का अनुभव लिया जा सकता है. बिनसर अपने जंगलों और पर्वतीय दृश्यों के लिए जाना जाता है.

कैंची धाम और जागेश्वर धाम एक साथ घूमना है तो बनाएं पांच दिन का प्लान: केएमवीएन के जीएम मनीष कुमार कहते हैं कि अगर आप उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद लेना चाहते हैं, तो कैंची धाम, नैनीताल, अल्मोड़ा और जागेश्वर धाम को एक साथ जोड़ सकते हैं. इसके लिए पांच दिन और चार रातों का कार्यक्रम सुविधाजनक रहेगा. पहले दिन काठगोदाम पहुंचकर नैनीताल या भवाली में ठहरें. दूसरे दिन कैंची धाम में दर्शन करने के बाद भीमताल या सातताल घूम सकते हैं. तीसरे दिन अल्मोड़ा की ओर रवाना हों और रास्ते में पहाड़ी दृश्यों का आनंद लेते हुए स्थानीय बाजारों में समय बिताएं. चौथे दिन जागेश्वर धाम और समय अनुकूल होने पर वृद्ध जागेश्वर जाएं. पांचवें दिन कसार देवी या चितई गोलू देवता मंदिर के दर्शन करके वापसी की यात्रा शुरू कर सकते हैं. इस पांच दिन के टूर में प्रति व्यक्ति लगभग 8,000 से 18,000 रुपये खर्च होने का अनुमान रखा जा सकता है.

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