चंपत राय पर नहीं पड़ने चाहिए दूसरों के पाप के छींटे : डाॅo सुशील कोटनाला
राम मंदिर को लेकर चंदा चुराई के आरोप लगाए जा रहे हैं और चंपतराय जी के सम्बन्ध में अनर्गल बातें की जा रही हैं, किन्तु प्रचुर दान के गणना की उचित व्यवस्था के लिए भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारियों द्वारा भी योगदान दिया जाता था और गणकों की कमीं के कारण भारतीय स्टेट बैंक ने कतिपय स्थानीय युवकों को भी गणक का दायित्व आवंटित किया था यद्यपि न्यास ने भी इनका अनुमोदन किया था……. शक्तिशाली सीसीटीवी कैमरों के व्याप्ति-परिक्षेत्र में गणना कार्य सम्पन्न होता था इसीलिए कतिपय गणकों द्वारा दानराशि की चोरी के दृश्य कैमरों में कैद हुए हैं …… क्या यह चंपतराय जी की पारदर्शिता का परिणाम नहीं है?मेरे तथा परिवार के सभी परिजनों द्वारा भी एक लाख रुपये से अधिक की धनराशि राममंदिर निर्माण कार्य हेतु न्यास को दान दी गई जिसका मुझे अत्यधिक गर्व है और उसके सदुपयोग का पूर्ण विश्वास भी। विश्वास का कारण अंध-भक्ति नहीं है अपितु उन तपे-तपाये शत-शत प्रचारकों के दधीचि जैसे त्याग का मैं अक्षि-साक्षी हूॅं। राममंदिर न्यास में सर्व-जाति-समाज के बन्धु हैं।गणक भी सर्व-जाति-समाज से रहे हैं। हिन्दू समाज के सर्व-जाति-समाज के विराट रूप के दर्शन मुझे प्रयाग महाकुंभ के समय हुए। आदिवासी समुदाय-अनुसूचित जाति समाज-सामान्य-जाति-समाज का अभेद स्वरूप केवल हिन्दू होने का भाव…… अयोध्या से प्रयाग तक एकरस-समरस-सनातन समाज त्रिवेणी में सब मिलकर गंगामग्न होकर अहं ब्रह्मास्मि के भावबोध से अनुप्राणित होकर एक भारत श्रेष्ठ भारत के भव्य तथा दिव्य दर्शन का मैं साक्षी हूॅं। ऐसे में कतिपय दूषित-मन दानराशि के चोर भी राममंदिर से अपनी दरिद्रता दूर करने का वैसा ही प्रयास कर रहे हैं जैसा महाकुंभ में गंगा जी में डुबकी लगा कर महापाप से कुण्ठित अपराधी किया करते हैं ….. उनके पापों की छींटें चंपतराय जी पर नहीं पड़नी चाहिए ….. हाॅं राममंदिर में ऐसी पापात्माएं दर्शन तो कर सकें पर समाज के द्वारा दान दिए हुए पवित्र-धन का अपहरण न कर सकें, जिससे दधीचि वृत्ति के प्रचारकों की तपस्या निष्फल न होने पाए ……
