प्रतीकात्मक फोटो
3 min read

1990 का साल अपने अवसान की तरफ बढ़ रहा था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ श्री राम जन्मभूमि अयोध्या की अस्मिता और भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने के लिए खड़ा हो गया था।

यह भी पढ़ें :  सोशल मीडिया चैनलों से ज्यादा जिम्मेदार निकला…

विश्व हिंदू परिषद के बैनर तले हिन्दू जागरण के लिए सम्पूर्ण राष्ट्र का आह्वान कर दिया गया था। समूचा देश खासकर हिंदी पट्टी अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए खड़ी हो रही थी।

यह भी पढ़ें :  भाजपा सरकार बनाना चाहती है तो सूचित करे: राज्यपाल

माननीय अशोक सिंघल जी के नेतृत्व में तरुणाई जाग रही थी। भारतीय जनता पार्टी के शिखर पुरुष लाल कृष्ण आडवाणी जी ने राम मंदिर के समर्थन में सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथ यात्रा प्रारंभ की । विश्व हिंदू परिषद ने राम ज्योति यात्रा निकाली।

यह भी पढ़ें :  विवादित जमीन रामलला की, मस्जिद के लिए अलग से 5 एकड़ जमीन

देश के अलग अलग हिस्सों में रामभक्तों पर राज्य सरकारों और केंद्रीय सत्ता ने दमनकारी आचरण ओढ़ा. रामभक्तों को जगह जगह मारा पीटा जाने लगा। उनको जबरन जेलों में बंद किया जाने लगा।
मेरे गृह जनपद आजमगढ़ में भी परिस्थितियां काफी संवेदनशील हो चली थीं। मेरी माता जी जो उस समय बनवासियों (सरल शब्दों में मुसहर) के बीच काम करती थीं, उनको नव सृजित दुर्गा वाहिनी आजमगढ़ की जिला संयोजिका बनाया गया था। कई कई थानों की पुलिस अक्सर घर पर देर रात छापा मारा करती थी।

यह भी पढ़ें :  सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन इससे संतुष्ट नहीं: जफरयाब जिलानी

हम चार भाई बहन कितनी मुश्किलों से दो चार थे, बताना अवर्णनीय है। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार थी। इतनी निर्दयी सरकार मैंने तो नहीं ही देखी है। बहरहाल आस्था और अस्मिता के जागरण के उस काल खंड में आडवाणी जी की यात्रा का पोस्टर चिपकाते मैं दीपावली के दो दिन पहले भोर में पुलिस द्वारा पकड़ लिया गया। मैं विद्या मंदिर से आठवीं उत्तीर्ण करने के बाद नवीं कक्षा में गया ही था। अक्टूबर के उस महीने में शायद 18 तारीख को दीपावली थीं ।

यह भी पढ़ें :  अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला नया सवेरा लेकर आया: मोदी

शिवनंदन पासवान शहर कोतवाल थे। पासवान का रामभक्तों पर कैसा कहर टूटता था, कल्पना से परे है। साढ़े पांच बजे मैं कोतवाली के लॉकअप में था। हर दस मिनट में पुलिस का कोई न कोई दरोगा, सिपाही आता था। धमकी और गालियों का जो नग्न तांडव शुरू होता था, उसका खात्मा उसके थक जाने के बाद ही खत्म होता था।

यह भी पढ़ें :  जय-पराजय की दृष्टि से फैसले को नहीं देखा जाए: मोहन भागवत

मुझे किसी ने ज्यादा मारा पीटा तो नहीं लेकिन मार पीट से ज्यादा खौफनाक मंजर से मुझे गुजरना पड़ता था। कच्ची उम्र और पुलिसिया तांडव क्या बताऊं, दो दिन और एक रात उस लॉकअप में कैसे गुजरी…….

यह भी पढ़ें :  आपियों, कांग्रेसियों के फर्जी ज्ञान से बचें

दीपावली के दिन मुझे दीवानी कचहरी में पेशेवर मुजरिमों की तरह अमानवीय स्थिति में ले जाया गया। मेरे साथ चार मुस्लिम युवक भी थे। छुट्टी का दिन था। पता नहीं कौन से मजिस्ट्रेट के सामने पेशी हुई। उसने मुझे बाल कारागार आजमगढ़ में चैदह दिनों के लिए भेजने का आदेश दिया। मैंने राहत की सांस ली कि इन अमानवीय पुलिस वालों से अब मुक्ति मिल जाएगी। पुलिस वालों की गालियां सुनता मैं फिर कोतवाली की तरफ था। मन में बड़ा संतोष भी था कि इन यमदूतों से मुक्ति बस मिलने को है।

लेकिन पता नहीं फिर क्या हुआ कि मुझे दो तीन घंटे बाद एसडीएम सदर के घर ले जाया गया। और एसडीएम ने अपने ऑर्डर में मुझे आजमगढ़ से दूर गोरखपुर की जेल में भेजने का आदेश दे दिया।
रात को साढ़े बारह बजे कोतवाली में एक पीएसी का ट्रक आया। जिसमें मुझे और चार मुस्लिम युवकों को लादकर गोरखपुर की जेल के लिए रवाना कर दिया गया। आजमगढ़ के बंदियों के लिए उस समय मुलायम सरकार ने गोरखपुर केंद्रीय जेल को चुना था।

यह भी पढ़ें :  कैदियों के बोझ से चरमरा रही देश की जेलें, यूपी में हालत ज्यादा खस्ता

तकरीबन एक महीने की जेल के दौरान गोरखपुर में मैं अकेला नाबालिग था। मुझे बाद में पता चला कि पूरे प्रदेश में मैं अकेला नाबालिग कारसेवक था, जो बड़ों के साथ इतने दिन तक बंद रहा।

कुछ दिनों के बाद माताजी भी गिरफ्तार कर ली गईं। वो भी गोरखपुर जेल भेजी गईं। महिला बैरक में बंद की गईं। फिर कुछ दिनों के बाद पापा भी पकड़ लिया गए। वो भी गोरखपुर जेल में एक दूसरी बैरक में। पापा पर तो मुलायम सरकार ने रासुका लगा दिया। सबसे बाद में पापा ही छूटे।

यह भी पढ़ें :  जब कारसेवकों के लहू से लाल हुई अयोध्या 

जेल के संस्मरण पर लिखने बैठूं तो किताब बन जाये। बहरहाल आडवाणी जी के जीते जी ही आज ये मौका आ गया कि मंदिर वहीं बनेगा। ‘मंदिर वहीं बनाएंगे’ कहने पर सामाजिक उपहास का दौर कालातीत हुआ। संघर्ष सार्थक हुआ।

आडवाणी जी को प्रणाम. सिंघल जी को नमन। आंदोलन के अग्रजों को सादर अभिवादन। सभी रामभक्तों को शुभकामनाएं। बधाई।
जय श्रीराम।

वरिष्ठ पत्रकार अम्बरीष राय की फेसबुक वाॅल से……

अपनी राय हमें contact@yugsakshi.com के जरिये भेजें। फेसबुकट्विटर और यूट्यूब पर हमसे जुड़ें।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति युगसाक्षी डॉट कॉम उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार युगसाक्षी डॉट कॉम के नहीं हैं, तथा युगसाक्षी डॉट कॉम उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here