फाइल फोटो
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दिल्ली। नोटबंदी के तीन साल पूरे होने पर आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि 2000 रुपए के नोट को बंद कर देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट की जगह लाए गए 2000 रुपए के नोट की जमाखोरी की जा रही है और इसे बंद कर देना चाहिए।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन साल पहले आठ नवंबर को, 2016 को 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट को बंद करने की घोषणा की थी। इसका मकसद काले धन पर अंकुश लगाना, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना और देश को लेस कैश अर्थव्यवस्था बनाना था।

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पूर्व आर्थिक सचिव गर्ग ने एक नोट में कहा, वित्तीय प्रणाली में अब भी काफी मात्रा में नकदी है। 2000 रुपए के नोटों की जमाखोरी इसका सबूत है। पूरी दुनिया में डिजिटल भुगतान का विस्तार हो रहा है। भारत में भी ऐसा ही हो रहा है। हालांकि विस्तार की रफ्तार धीमी है। वित्त मंत्रालय से ट्रांसफर के बाद गर्ग ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी।

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गर्ग ने कहा कि मूल्य के आधार पर चलन में मौजूद मुद्रा में 2000 रुपए के नोट की एक तिहाई हिस्सेदारी है। उन्होंने दो हजार रुपए के नोट को बंद करने या चलन से वापस लेने की वकालत करते हुए कहा, वास्तव में 2000 रुपए के नोटों का एक अच्छा-खासा हिस्सा चलन में नहीं है। इनकी जमाखोरी हो रही है। इसलिए मुद्रा के लेन-देन में 2000 रुपए के नोट ज्यादा नहीं दिखते हैं।

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गर्ग ने आगे कहा, बिना किसी दिक्कत के इन नोटों को बंद किया जा सकता है। इसका एक आसान तरीका है कि इन नोटों को बैंक खातों में जमा कर दिया जाए।

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