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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का आज जन्म दिन है। वर्तमान राजनीति में अमित शाह को चाणक्य की संज्ञा मिली है। अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जोड़ी ने देश की राजनीति की दिशा और दशा बदलने का काम किया है। बीजेपी का चेहरा अगर मोदी हैं तो उसकी रीढ़ की हड्डी अमित शाह को कहा जा सकता है।

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इसमें कोई दो राय नहीं है कि अमित शाह की बेहतर रणनीति और चुनाव प्रबंधन की बदौलत आज बीजेपी का कमल देश के ज्यादातर हिस्सों में खिला दिखाई देता है। अमित शाह ने जब से बीजेपी अध्यक्ष की कमान संभाली है, तब से पार्टी ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। हालांकि उनको राजनीति विरासत में नहीं मिली है।

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आज से 55 वर्ष पूर्व मुंबई के संपन्न गुजराती परिवार में पैदा हुए शाह की मां का नाम कुसुमबेन और पिता का नाम अनिलचंद्र शाह है। शेयर ब्रोकर के रूप में अपना कैरियर शुरू करने वाले शाह को सफल रणनीतिकार माना जाता है। जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा, तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। ये उनके प्रबंधन का ही करिशमा है कि उन्होंने देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस और समूचे विपक्ष साइड लाइन कर दिया है।

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शाह 16 वर्ष की अवस्था में आरएसएस से जुड़ गए थे और एबीवीपी के कार्यकर्ता बन गए थे। शाह अपनी कार्यकुशलता और सक्रियता के दम पर महज दो वर्ष बाद यानी 1982 में एबीवीपी की गुजरात इकाई के संयुक्त सचिव बन गए। उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 1986 में मुलाकात हुई थी और यह मुलाकात मित्रता में बदल गई थी। अमित शाह साल 1987 में बीजेपी की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा में शामिल हुए और सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन में सफलतापूर्वक प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी निभाई। इस दौरान अमित शाह का संपर्क लालकृष्ण आडवाणी से हुआ।

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अमित शाह ने साल 1997 में पहली बार गुजरात के सरखेज विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर विधायक पद के लिए नामांकन भरा और भारी मतों से विजयी हुए। विधानसभा क्षेत्र में अमित शाह की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगता है कि आने वाले हर चुनाव में उनकी जीत का अंतर लगातार बढ़ता गया।

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अमित शाह ने साल 2002 में पहली बार मंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद उन्होंने गुजरात सरकार के मंत्री के रूप में गृह, यातायात, निषेध, संसदीय कार्य, विधि और आबकारी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। अमित शाह के जीवन में कई उतार चढ़ाव आए। साल 2010 में फर्जी एनकाउंटर के मामले में अमित शाह का नाम आया और उनको जेल भेज दिया गया। इसके बाद 2015 में सीबीआई की एक विशेष अदालत ने इस एनकाउंटर केस में अमित शाह को बरी कर दिया।

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अमित शाह की क्षमता को देखते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उनको राष्ट्रीय महासचिव बनाकर 80 सांसदों वाले उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया। इसके बाद साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 71 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। असल में यूपी जैसे बड़े व राजनीति के हिसाब से जटिल प्रदेश में अमित शाह ने जो कमाल किया उसी की बदौलत जुलाई 2014 में अमित शाह को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी मिली। वो पार्टी के सबसे युवा अध्यक्ष हैं। जनवरी 2016 को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में दोबारा से चुना गया और वो अभी तक इस पद पर बने हुए हैं।

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पिछले पांच साल में अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी ने कई कीर्तिमान स्थापित किये हैं। आज देश में पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक आपको बीजेपी की उपस्थिति आसानी से दिखती है। इसका श्रेय अमित शाह को ही जाता है। जिन क्षेत्रों में बीजेपी का कोई नाम लेने वाला नहीं होता था, वहां भी लोग आज बीजेपी और मोदी को जानते हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों से लेकर पश्चिम बंगाल तक में बीजेपी की भारी भरकम हाजिरी का श्रेय अमित शाह को ही जाता है।

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वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में अमित शाह की चुनाव रणनीति ने सारे विरोधियों को पटखनी देने का काम किया। चुनाव विशलेषकों के सारे अनुमान धरे के धरे रह गए। और बीजेपी पिछले चुनाव के मुकाबले ज्यादा सीटों के साथ सत्ता में वापस आई। इस बार अमित शाह को केंद्रीय गृहमंत्री बनाया गया। इसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने जैसे कई ऐतिहासिक कदम उठाए।

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अपनी वाकपटुता, जमीनी पकड़, पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क के चलते अमित शाह दिन ब दिन नये-नये कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। फिलवक्त विरोधियों के पास उनकी चुनाव रणनीतियों से निपटने का कोई फार्मूला नहीं है। घोर संकट के समय और विपरीत परिस्थितियों के बीच सदा मुस्कराते रहना अमित शाह को दूसरे नेताओं से अलग बनाता है। सचमुच शाह फिलवक्त भारतीय राजनीति के चाणक्य हैं।

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