कमलेश तिवारी एवं प्रकाश पाल (फाइल फोटो)
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नृशंस हत्या की दो घटनाओं ने देश के समस्त राष्ट्रवादियों को हिलाकर रख दिया है। पहला हत्याकांड पश्चिम बंगाल में हुआ, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कर्मठ कार्यकर्ता, उनकी गर्भवती पत्नी एवं आठ-वर्षीय बच्ची की निर्मम हत्या कर दी गई। फर्जी सेकुलरिए किसी देशद्रोही के मारे जाने पर आसमान सिर पर उठा लेते हैं तथा विदेशों में भी भारत को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। किन्तु उन्होंने इस नृशंस हत्याकांड के विरुद्ध चूं तक नहीं की। सत्तर वर्षों में फर्जी सेकुलरवाद हमारे यहां चप्पे-चप्पे में घुस गया है, जिसके कारण तमाम अखबार व टीवी-चैनल भी वैसे ही चरित्र के हो गए हैं। इसीलिए उन सबने भी पश्चिम बंगाल के उस वीभत्स हत्याकांड के प्रति चुप्पी साधी। उसी के परिणामस्वरूप अधिकांश लोगों को उक्त हत्याकांड की जानकारी तक नहीं हो पाई।

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राष्ट्रवादी की नृशंस हत्या की दूसरी घटना गत दिवस लखनऊ में हुई, जिसमें हिन्दू महासभा के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष एवं हिन्दू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी को गला रेतकर हलाल कर दिया गया। कमलेश तिवारी अयोध्या मामले के एक पक्षकार भी थे। बंगाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता व उसके परिवार की जो निर्मम हत्या की गई, उसके लिए तो वहां की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पूरी तरह जिम्मेदार हैं, क्योंकि उनके शासन की नीति ही कट्टरपंथी देशद्रोही मुसलिमों को संरक्षण देना और हिन्दुओं का विरोध करना है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो शत-प्रतिशत देशभक्त एवं राष्ट्रवाद के पोषक हैं, इसलिए यहां कमलेश तिवारी की हत्या के लिए मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि गृह विभाग व पुलिस तंत्र पूरी तरह जिम्मेदार है।

कमलेश तिवारी काफी समय से पर्याप्त सुरक्षा दिए जाने की गुहार लगा रहे थे। लगभग एक वर्ष पूर्व गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने दो आतंकवादियों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसमें कमलेश तिवारी की हत्या की साजिश रचे जाने का भी उल्लेख था। कमलेश तिवारी के घर में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था, किन्तु वह काम नहीं कर रहा था। कमलेश तिवारी की बार-बार गुहार के बावजूद उनकी जान के खतरे को देखते हुए भी उन्हें समुचित सुरक्षा नहीं प्रदान की गई। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री से भी रक्षा की गुहार लगाई थी और उन्हें इस सम्बंध में ट्वीट किया था।

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कमलेश तिवारी काफी समय से पर्याप्त सुरक्षा दिए जाने की गुहार लगा रहे थे। लगभग एक वर्ष पूर्व गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने दो आतंकवादियों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया था, जिसमें कमलेश तिवारी की हत्या की साजिश रचे जाने का भी उल्लेख था। कमलेश तिवारी के घर में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था, किन्तु वह काम नहीं कर रहा था। कमलेश तिवारी की बार-बार गुहार के बावजूद उनकी जान के खतरे को देखते हुए भी उन्हें समुचित सुरक्षा नहीं प्रदान की गई। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री से भी रक्षा की गुहार लगाई थी और उन्हें इस सम्बंध में ट्वीट किया था।

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बताया जाता है कि कमलेश तिवारी ने मुहम्मद साहब के विरुद्ध लगभग चार साल पहले कोई टिप्पणी की थी, जिससे नाराज होकर मौलाना अनवारुल हक ने कमलेश तिवारी का सिर कलम करने वाले को 51 लाख रुपये देने की घोषणा की थी। यह भी बताया जाता है कि 6 दिसम्बर, 2015 को मुफ्ती नईम नामक व्यक्ति ने कमलेश तिवारी का सिर कलम करने पर 1.11 करोड़ रुपये और हीरों का हार देने की घोषणा की थी। बिजनौर के दो मौलानाओं ने 1.62 करोड़ रुपये का ईनाम घोषित किया था। कमलेश तिवारी ने जो धार्मिक टिप्पणी की थी, उस पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन उनका सिर कलम करने की जिन लोगों ने घोषणाएं कीं, उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। सुनमें में आया है कि कमलेश तिवारी के हत्याकांड को कुछ अफसर आपसी रंजिश का मामला बताने का प्रयास कर रहे हैं। हत्याकांड के बाद कमलेश तिवारी के घर के बाहर भीड़ का चित्र अखबार में छपा है, जिसमें एक पुलिस अफसर बड़ी प्रसन्न मुद्रा में है। उसकी इस खुशी की जांच की जानी चाहिए।

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निश्चित रूप से, किसी को किसी की धार्मिक भावना को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए। किन्तु यह बात एक-पक्षीय नहीं होनी चाहिए। हिन्दू देवी-देवताओं को गाली देने एवं तरह-तरह से हिंदुओं की भावनाओं को चोट पहुंचाने की विगत 70 वर्षाें से देश में खुली छूट मिली हुई है। जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस का जो हिन्दूविरोधी चरित्र बना, वह अब तक चला आ रहा है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री के रूप में अर्जुन सिंह ने अयोध्या में ‘सहमत’ प्रदर्शनी लगवाई थी, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं के घोर आपत्तिजनक चित्रों तथा गलत इतिहास का प्रदर्षन किया गया था। चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन ने तो हिन्दू देवी-देवताओं के अनेक नग्न चित्र बनाए तथा हनुमान जी के साथ उनके बहुत अश्लील दृश्य प्रदर्शित किए। लेकिन मकबूल फिदा हुसैन को जेल में डालकर दंडित करने के बजाय उसे ‘पद्मश्री’ का राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया था। अकबरुद्दीन औवेसी ने सार्वजनिक रूप से एक भाषण में बड़े भद्दे शब्दों में कौशल्या को बदचलन कहा और राम व उनके भाइयों को नाजायज औलाद बताया। लेकिन उसके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई। वह और उसका बड़ा भाई असदउद्दीन औवेसीी खुलेआम चारों ओर जहर उगल रहे हैं और माहौल गंदा कर रहे हैं, फिर भी उन दोनों भाइयों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानकर जेल में नहीं डाला जा रहा है।

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देश में राष्ट्रवादियों की हत्या आम बात होती जा रही है और इस दिशा में मोदी की राष्ट्रवादी सरकार को कठोर कदम उठाने होंगे। केरल व पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सैकड़ों कार्यकर्ताओं की हत्या की जा चुकी है तथा वहां ‘संघ’ के कार्यकर्ताओं को मारा जाना आम बात हो गई है। उन दो राज्यों पर देशविरोधी तत्व लम्बे समय से अपना कब्जा जमाए हुए हैं तथा उनका एकमात्र निशाना हिन्दू हैं। चूंकि सच्चे हिन्दू का चरित्र राष्ट्रवादी होता है, इसलिए देशविरोधी तत्व राष्ट्रवादी हिन्दुओं को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं।

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हमारे देश के इतिहास में सबसे बड़ा देशद्रोही जवाहरलाल नेहरू हुआ, जिसकी अन्य हरकतों से तो देश को भीषण क्षति पहुंची ही, उसके फर्जी सेकुलरवाद ने देश को ऐसा घुन दे दिया, जिसने देश को खोखला करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस फर्जी सेकुलरवाद का वास्तविक अर्थ भारतीय संस्कृति एवं हिंदुत्व का उन्मूलन करना है। कांग्रेस के इसी फर्जी सेकुलरवाद की उपज अन्य अनेक राजनीतिक दल, टुकड़े-टुकड़़े गैंग, पुरस्कार-वापसी गैंग, हिन्दू नामधारी फर्जी सेकुलरिये आदि हैं। तालिबानी चरित्र के कट्टरपंथी मुसलमानों ने नेहरू के फर्जी सेकुलरवाद का जमकर फायदा उठाया तथा उसकी आड़ में देशभर में अपनी जड़ें मजबूत कीं। यही कारण है कि देश द्रोही तत्व देश के कोने-कोने में न केवल प्रविष्ट हो गए हैं, बल्कि ताकतवर होते जा रहे हैं।

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देश द्रोही तत्वों को विगत 70 वर्षों से जो संरक्षण मिला है, उससे देश निरंतर कमजोर हो रहा है। अधिकांश्तः ये तत्व छिपकर देश की जड़ खोखली कर रहे हैं। इनकी हरकतों के परिणामस्वरूप देश ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठा हुआ प्रतीत हो रहा है। अब इस बात की घोर आवश्यकता है कि मोदी सरकार देशभर में ऐसे तत्वों को ढ़ूंढ़-ढूंढ़कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करे। तय बात है कि जब कठोर कार्रवाई होगी तो सरकार के विरुद्ध फर्जी सेकुलरवादी तत्व भयंकर शोर मचाएंगे और आसमान सिर पर उठा लेंगे। लेकिन बिना कठोर कार्रवाई के उन पर काबू पाना अब लगभग असंभव हो गया है। कश्मीर में छूट के परिणामस्वरूप देश द्रोही तत्व जितने ताकतवर हो गए, उसका दुष्परिणाम सामने आ चुका है। इसलिए अब तनिक भी गफलत नहीं की जानी चाहिए।

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दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय देशद्रोह की बहुत बड़ी टकसाल बना हुआ है, इसलिए अब उस पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। उसके संचालन का पूरा खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है, जो देशद्रोही तत्वों को पनपने में मददगार हो रहा है। अतः जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का शुद्धीकरण किया जाना बहुत आवश्यक है तथा उसका नाम बदलकर वहां सुब्रम्हमण्यम स्वामी-जैसा कोई कड़क प्रशासक नियुक्त किया जाना चाहिए। सरकारी तंत्र में कर्मचारियों व अफसरों के रूप में जो देशद्रोही तत्व कब्जा जमाए हुए हैं, उनकी गहन छानबीन कर उन्हें निकाल बाहर किया जाना चाहिए।

-श्याम कुमार, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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