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भारतीय क्रिकेट में कई वर्षों से आमूलचूल परिवर्तन की मांग उठती आयी है। खासकर क्रिकेट संघों पर कब्जा जमाकर बैठे लोगों को हटाने में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित कमेटी भी बुरी तरह असफल साबित हुई है।

कई अवसरों पर इस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व सीएजी विनोद राय पर भी पक्षपात और निजी लाभ के लिए फैसलों को टालने का आरोप लग चुका है। भारतीय क्रिकेट में सुधार की पहल बिहार के आदित्य वर्मा ने की भारतीय क्रिकेट पर कब्जा जमाये बैठे सबसे ताकतवर शख्स एन श्रीनिवासन को हटाने में बिहार के आदित्य वर्मा का बड़ा योगदान रहा है।

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उनके द्वारा सट्टेबाजी के खिलाफ आवाज उठाने के बाद जब मामले की जांच हुई तो एक एक कर सारे राज खुलते चले गये। इसी वजह से श्रीनिवासन को जबरन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से लगभग धक्का मारकर सुप्रीम कोर्ट ने बाहर कर दिया। उसके बाद ही स्थिति में सुधार के लिए विशेष कमेटी का गठन किया गया था।

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अब भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और सीएबी के निर्विरोध अध्यक्ष सौरभ गांगुली को इसकी कमान सौंपी जा रही है। इस वक्त नये अध्यक्ष के लिए स्थिति को बेहतर बनाने की सबसे बड़ी चुनौती है। खुद सौरभ गांगुली भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि वर्तमान में बीसीसीआई की छवि खराब है।

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उन्होंने कहा कि इस खराब स्थिति को सुधारने की चुनौती ही शायद उनके लिए सुनहरा अवसर भी है। इसलिए वह इस चुनौती को खुले दिल से स्वीकार करेंगे। इतना तो तय है कि एक सफल कप्तान के तौर पर कमसे कम सौरभ गांगुली क्रिकेट मैदान के अंदर की बारिकियों और खिलाड़ियों की परेशानी को समझते हैं।

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सौरभ बतौर खिलाड़ी हर खिलाड़ी की परेशानी को समझते हैं बीसीसीआई के नये अध्यक्ष के चयन में गांगुली के सामने पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी ब्रिजेश पटेल थे। वैसे सौरभ ने आने के पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह सबसे पहले श्रेणी क्रिकेटरों की देखभाल को प्राथमिकता देंगे।

गांगुली का इरादा भारतीय क्रिकेट के सभी पक्षों से मिलने का और वे सारे काम करने का है जो पिछले 33 महीने में प्रशासकों की समिति नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि पहले मैं सभी से बात करूंगा और फिर फैसला लूंगा।

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मेरी प्राथमिकता प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों की देखभाल करना होगा। मैं तीन साल से सीओए से भी यही कहता आया हूं लेकिन उन्होंने नहीं सुनी। सबसे पहले मैं प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों की आर्थिक स्थिति दुरूस्त करूंगा। कूलिंग आफ अवधि के कारण उन्हें जुलाई में पद छोड़ना होगा।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 18000 से अधिक रन बना चुके पूर्व कप्तान ने कहा कि निर्विरोध चुना जाना ही बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह विश्व क्रिकेट का सबसे बड़ा संगठन है और जिम्मेदारी तो है ही, चाहे आप निर्विरोध चुने गए हों या नहीं।

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प्रथम श्रेणी के खिलाड़ियों पर उनका फोकस रहेगा भारत क्रिकेट की महाशक्ति है तो यह चुनौती भी बड़ी होगी। वैसे सिर्फ नौ महीनों के लिए इस पद पर होने के सवाल पर गांगुली ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह कुर्सी से चिपके रहने की राजनीति करने नहीं आये हैं।

मात्र नौ महीने के बाद उन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ेगी। उन्होंने कहा- जब मैं आया तो मुझे पता नहीं था कि मैं अध्यक्ष बनूंगा। पत्रकारों ने मुझसे पूछा तो मैने बृजेश का नाम लिया। मुझे बाद में पता चला कि हालात बदल गए हैं। मैने कभी बीसीसीआई चुनाव नहीं लड़ा तो मुझे नहीं पता कि बोर्ड रूम राजनीति क्या होती है।

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गांगुली ने शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। यह पूछने पर कि पश्चिम बंगाल में चुनाव में क्या वह भाजपा के लिए प्रचार करेंगे, उन्होंने ना में जवाब दिया। वैसे अपने बयान से ही सौरभ गांगुली ने संकेत दे दिया है कि वह गड़े मुर्दे उखाड़ने के पक्ष में कतई नहीं है।

सिर्फ प्रथम श्रेणी के क्रिकेटरों की आर्थिक दशा सुधारने की बदौलत वह भारतीय क्रिकेट को और अधिक प्रतिस्पर्धा से जोड़ना चाहते हैं। यह अपने आप में एक अच्छी पहल होगी। लेकिन इसी क्रम में सौरभ गांगुली के समक्ष कई राज्यों में पर्दे के पीछे से शासन चला रहे महारथियों का कब्जा समाप्त करने की बड़ी चुनौती भी हैं। इनमें सबसे पहला नाम तो झारखंड क्रिकेट पर वर्षों से कब्जा जमाये बैठे अमिताभ चैधरी का नाम है।

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भारतीय क्रिकेट में अमिताभ चौधरी जैसों को हटाना भी सौरभ के लिए बड़ी चुनौती वैसे ही समझा जाता है कि अमिताभ चौधरी और सौरभ गांगुली अलग अलग धुव्र के व्यक्तित्व हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि वर्तमान क्रिकेट टीम के अधिकांश सदस्यों को वह व्यक्तिगत तौर पर जानते हैं।

लिहाजा उनके भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में आने से कुछ अच्छे बदलावों की उम्मीद की जा सकती है। वरना राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों के साथ साथ बड़े व्यापारियों के इस पर कब्जा होने की वजह से हाल के दिनों में भारत में क्रिकेट का खेल संबंधी आकर्षण तेजी से घटता चला गया है। जिसकी मुख्य वजह सट्टेबाजी और क्रिकेट की राजनीति ही रही है। (साभार: रा0 खबर)

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