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शहीद-ए-आजम भगत सिंह का आज जन्मदिन है। देश उनकी कुर्बानी को कभी नहीं भुला सकता।. गुलामी के समय देश के युवाओं में जोश भरने के लिए भगत सिंह और उनके दोस्तों ने जो काम किया उसने उन्हें अमर बना दिया। आज देश में भगत सिंह को अपना आदर्श मानने वाले युवाओं की संख्या बढ़ रही है। वे उन्हें अपना हीरो मानते हैं। देश प्रेम और बहादुरी में भगत सिंह का कोई सानी नहीं है। वे देश की खातिर किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते थे। भगत सिंह ने अपने विचारों और कार्यों से देश की जनता में आजादी के लिए जुनून पैदा किया।

लायलपुर जिले के बंगा (अब पाकिस्तान में) 28 सितंबर को किशन सिंह और माता विद्यावती के घर जन्मे भगत सिंह को 19 साल की उम्र में विवाह के बंधन में बांधने का प्रयास किया गया तो वह घर से भाग गए और अपने पीछे अपने माता- पिता के लिए एक पत्र छोड़ गए जिसमें लिखा था, ‘‘मेरा जीवन एक महान उद्देश्य के लिए समर्पित है और वह उद्देश्य देश की आजादी है। इसलिये मुझे तब तक चैन नहीं है। ना ही मेरी ऐसी को सांसारिक सुख की इच्छा है जो मुझे ललचा सके।’’

इतनी कम उम्र में जिस युवा का इतना बड़ा संकल्प और इतना दृढ़ निश्चय होगा वह कोई साधारण युवा तो नहीं हो सकता। वह केवल बारहवीं पास कर के घर से भाग कर चन्द्रशेखर आजाद की क्रांतिकारी पार्टी में शामिल हो गए थे। बहुत अधिक शिक्षित न होने पर भी उन्होंने ‘‘मैं नास्तिक क्यों हूं’’ सहित जितना भी लिखा उससे उनकी वैचारिक गहराइयों का स्वतः ही अनुमान लग जाता है।

देश को आजाद कराने के लिये उन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं की। ब्रिटिश हुकूमत ने उन पर डेढ़ साल तक मुकदमा चलाया। उन्हें फांसी की सजा सुनाई गयी। वो हंसतें हुए फांसी के तख्ते तक गए। बाद में दर्ज हुआ कि मजाक करते हुए जा रहे थे। उनका वजन दस पौंड बढ़ गया था। ‘भारत माता की जय’ बोलते हुए अपने दो साथियों के साथ वो फांसी के तख्ते पर झूल गए। कभी भी थक जाने पर वो एक गीत गाया करते थे जो भगतसिंह बाद में काफी मन से गाते थे। सेवा देश दी जिंदडिए बड़ी औखी, गल्लां करनीआं ढेर सुखल्लीयां ने। जिन्नां देशसेवा विच पैर पाया, उन्नां लक्ख मुसीबतां झल्लियां ने यानी देश सेवा करनी बहुत मुश्किल है, जबकि बातें करना खूब आसान है। जिन्होंने देश सेवा के रास्ते पर कदम उठा लिया वे लाख मुसीबतें झेलते हैं।

महान विद्धान और सुधारक ईश्वरचंद्र विद्यासागर ने भगत सिंह के बारे में कहा था कि, “वह भारत के युवाओं की वीरता के प्रतीक थे। एक कान्तिकारी, जिसने ब्रिटिश सरकार को चेतावनी देने के लिये विधानमंडल के सत्र के दौरान बम फेंक दिया। उन्हें मार दिया गया पर वह देशवासियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगें।” भगत सिंह के दुनिया से विदा लेने के लगभग नौ दशकों बाद भी उनके विचारों की प्रासंगिकता और जरूरत बनी हुई है। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि भगत सिंह के विचारों को जाना जाए और उनके माध्यम से आज की समस्याओं के समाधान खोजने की कोशिश की जाए।

भगत सिंह ने देश के लिए जैसा सपना देखा था वह आज भी अधूरा है। देश के लिए जो विचार भगत सिंह के थे उनसे युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए। युवाओं को उनके सपनों को साकार करना होगा। हम सबका यह दायित्व है कि देश को श्रेष्ठ बनाने के लिए सब एकजुट होकर काम करें। युवाओं के लिए देश सर्वोपरि होना चाहिए। भगत सिंह युवाओं के आदर्श हैं। सभी को उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि भगत सिंह पूरे देश के हीरो हैं। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। आज युवा भगत सिंह के विचारों से प्रभावित हैं। वे भगत सिंह से दिल से जुड़े हुए हैं। लेकिन जरुरत इस बात की है कि युवा भगत सिंह के विचारों को मन से स्वीकारें। आज समय आ गया है कि युवा मूर्तियों, टी शर्ट के प्रतीकों से आगे बढ़कर भगत सिंह के विचारों को समझें और अन्याय के खिलाफ बेबाकी से प्रतिरोध में खड़े हों ‘आगे का रास्ता इन्ही जन संघर्षों से होकर गुजरेगा’ इस पर क्रांतिकारी कवि पाश की कविता “भगत सिंह ने पहली बार’’ की ये पंक्तियां याद आती हैं-

“जिस दिन फांसी दी गई
उनकी कोठरी में लेनिन की किताब मिली
जिसका एक पन्ना मुड़ा हुआ था
पंजाब की जवानी को
उसके आखिरी दिन से
इस मुड़े पन्ने से बढ़ना है आगे, चलना है आगे।’’

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