मुख्यमंत्री की भी नहीं सुनता एमडीडीए

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देहरादून।राज्य बनने से लेकर आज सत्रह वर्ष के बाद भी उत्तराखंड में अफसरशाही हावी रही है,सरकारें आईं गईं पर बड़े बाबुओं का वही हाल।इसे लम्बे जनसंघर्षो व 42 शहादतों के बाद बने 27वें राज्य देवभूमि उत्तराखंड का दुर्भाग्य नहीं तो और क्या कहेंगे।
आज राज्य की पहली निर्वाचित सरकार के मुख्यमंत्री पं0 नारायण दत्त तिवारी भले ही अपने जीवन के लगभग आखिरी दिनों में अस्पताल में भर्ती हों,लेकिन उनका भारी भरकम कद भी अफसरशाही को मनमानी करने से रोक नहीं पाया या फिर यूँ कहें कि तिवारी जी ने उनको मनमानी करने से रोकना ही नहीं चाहा।
ताजा मामला राज्य की अस्थाई राजधानी देहरादून के विकास प्राधिकरण एमडीडीए का है।देहरादून व मसूरी के सुनियोजित विकास की खातिर बने इस प्राधिकरण का तो मानो भगवान ही मालिक है। एमडीडीए के तमाम कारनामे तो आये दिन सामने आते ही रहते है लेकिन एम0डी0डी0ए अब मुख्यमंत्री के आदेश की भी धज्जिया उड़ाने लग गया है।मामला ट्रांसपोर्ट नगर का है जहां कि सड़क के निर्माण का आदेश मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री द्वारा कई बार दिया जा चुका है लेकिन बावजूद इसके एम0डी0डी0ए के कानों में जूं ताे रेंगी लेकिन मात्र खानापूर्ति के लिए।एम0डी0डी0ए ने ट्रांसपोर्ट नगर के गड्डो को भरने के लिए पत्थर-रोड़े तो गड्डे में बिछाई लेकिन एम0डी0डी0ए ने कार्य आधे में ही छोड़ दिया जिसके चलते कल रात माल से भरा एक ट्रक गड्डे में फसने की वजह से पलट गया। ट्रक पलटने की वजह से पांच लोगों की जान बाल-बाल बची।अगर एम0डी0डी0ए ऐसे ही सोता रहा तो आये दिन ऐसे हादसे ट्रांसपोर्ट नगर में होते रहेंगे लेकिन हर ‘किसी के लिए जाको राखे साईयां मार सके न कोई’ कहावत सच साबित नहीं हो पाएगी।एम0डी0डी0ए मूक दर्शक बन आये-दिन ऐसे हादसों को निमंत्रण दे रहा है और सड़क से जुड़े सवालात पर जल्द ही सड़क बनने का आश्वासन दे रहा है, लेकिन धरातल में ये आश्वासन कितने सच साबित हो रहे है इससे तो हम सब वाकिफ है ही।कुल मिलाकर हम कह सकते हैं कि जनता को आश्वासनों की घुट्टी पिलाकर एमडीडीए अपना काम चला रहा है, जनता परेशान है और एमडीडीए परेशान प्राधिकरण।

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