डबल इंजन सरकार के बावजूद वेतन के लाले

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देहरादून।देश से लेकर प्रदेश में कहने को तो चाहे डबल इंजन की सरकारें हो, लेकिन देवभूमि उत्तराखंड की माली हालात ठीक नहीं है।राज्य सरकार के पास अपने मुलाजिमों की पगार का पर्याप्त पैसा भी नहीं है।इससे पूर्ववर्ती कांग्रेस की राज्य सरकार भाजपा की केन्द्र सरकार के ऊपर कंगाली व बदहाली का ठीकरा फोड़ती थी, किन्तु अब राज्य व केन्द्र दोनों जगहों पर डबल इंजन वाली सरकार है, बावजूद इसके सरकार के सामने अपने कर्मचारियों हेतु मासिक वेतन के लाले पड़े हैं ।
राज्य के सरकारी कार्मिकों को सातवें वेतनमान के भत्तों को देने के दबाव से जूझ रही सरकार को मौजूदा वेतन, मानदेय के भुगतान को चालू माह में भी बाजार से उधार लेने को मजबूर होना पड़ा है। सरकार ने 400 करोड़ का ऋण लिया है। ऋण का यह आंकड़ा चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही पूरी होने से पहले ही बढ़कर अब 1700 करोड़ हो गया है।राज्य में सार्वजनिक निगमों, निकायों, प्राधिकरणों के कार्मिकों को अब तक सातवां वेतनमान नहीं मिला है। वहीं राजकीय कर्मचारी सातवां वेतनमान मिलने के बाद अब नए वेतनमान के मुताबिक भत्ते मिलने का इंतजार कर रहे हैं। माली हालत खराब होने के चलते सरकार को अपने कार्मिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में मुश्किलें पेश आ रही हैं। इस वजह से चालू वित्तीय वर्ष में बीते मई माह से ही तकरीबन हर माह सरकार को बाजार से ऋण उठाना पड़ रहा है।दरअसल, आमदनी कम और खर्च ज्यादा को बोझ तले दबी सरकार सीमित संसाधनों की चुनौती से जूझ रही है। सातवां वेतनमान लागू करने के बाद सरकारी खजाने पर हर माह तकरीबन 150 करोड़ से ज्यादा भार बढ़ा है। हालांकि सरकार अभी तक सातवें वेतनमान का एरियर सरकारी कार्मिकों को नहीं दे पाई है। राज्य के सेवानिवृत्त कार्मिकों को भी पेंशन एरियर का अभी तक सिर्फ 50 फीसद भुगतान ही हो पाया है।
चालू माह में भी सरकार ने आरबीआइ की अनुमति के बाद 400 करोड़ ऋण लिया है। बीते माह अगस्त में सरकार ने 300 करोड़ ऋण लिया था। अब तक बाजार से 1700 करोड़ ऋण लिया जा चुका है। हालांकि, ऋण का यह आंकड़ा अभी आरबीआइ से निर्धारित सीमा के भीतर ही है।

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