कोटद्वार नगर निगम बनने का विरोध

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कोटद्वार नगर निगम बनने का विरोध

लेख- कपिल रतूड़ी। कोटद्वार नगर क्षेत्र को नगर पालिका के दर्जे से ऊपर नगर निगम का तोहफा देने से कोटद्वार भाबर क्षेत्र में राजनितिक उबाल आ गया है। राज्य की भाजपा सरकार द्वारा कोटद्वार की जनता को दिए गए इस बेहतरीन तोहफे को अब कई जनप्रतिनिधि आंदोलन की शक्ल देने के मूड में है। कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र के पूरे के पूरे नगर निगम में समाहित होने व राज्य सरकार की कैबिनेट मंजूरी से जहां नगरवासियो में उत्सुकता देखने को मिल रही है, वही कोटद्वार नगर क्षेत्र से सटे गावो में उलझन की स्थिति बनी हुई है। कोटद्वार विधानसभा की कुल चार पट्टियों सुखरो, सनेह, मोटाढाक और हल्दूखाता के लगभग 71 राजस्व गांव को मिलाकर प्रस्तावित कोटद्वार नगर निगम सनेह से झण्डीचौड़ और सिगड्डी (चिल्लरखाल ) तक फैली होगी, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र की अधिकता है, जिसके अंतर्गत सुखरो पट्टी के 15 गाँव, सनेह पट्टी के 13 गाँव ,हलदुखता पट्टी के लगभग 23 गाँव और मोटाढांग पट्टी के 20 गाँव शामिल होंगे। यानि कोटद्वार विधानसभा की विधायकी का रोब दाब अब कम होगा जब एक ही म्यान में दो तलवारे होंगी। परन्तु इस समय सत्तारूढ़ भाजपा का यह निर्णय विपक्षी दलों सहित स्वयं सत्तारूढ़ दल के कई नेताओं को नागंवार गुजर रहा है। बल्कि भाबर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और छुटभयैनेता, जिन्हें अपना अस्तित्व खतरे में दिखाई दे रहा है, ने अब नगर निगम के विरोध में आंदोलन करने की धमकी दे डाली है। इन प्रतिनिधियों का मानना है कि जनप्रतिनिधि होने के नाते नगर निगम के सीमांकन करते समय उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया है, और मनमाने तरिके से कोटद्वार नगर निगम को यहां की जनता पर थोपा जा रहा है। बल्कि कुछ तो ये भी कहने से नहीं कतरा रहे है कि माँगा तो जिला था और मिला नगर निगम। हालांकि नगर निगम के अपने फायदे है और जिले के अपने अलग फायदे है, परन्तु कोटद्वार नगर निगम को स्थापित करने के लिए ठेठ ग्रामीण क्षेत्र को भी आनन फानन में मिलाया जा रहा है। कोटद्वार से सटे ग्रामीण इलाके जो विकासशील स्थिति में है और जहाँ के नागरिक मानसिक रूप से नगर निगम का हिस्सा बनने को तैयार है उन्हें कोटद्वार नगर निगम में सम्मिलित किया जाता तो बेहतर होता ,परन्तु ऐसे क्षेत्र भाबर जहां अभी दो माह पूर्व एक युवक की शादी इसलिए टूट गई कि उसके घर में शौचालय तक नही बना हुवा था, जो कि आज भी ठेठ ग्रामीण हे उन्हें नगर निगम का हिस्सा बनाना , ये समझ से परे है। कोटद्वार नगर निगम बनने से सर्वाधिक नुकसान अगर होगा तो इसी परिवेश को होगा, जहां की जीविका खेती और पशुपालन पर ही निर्भर है। जहां आज भी मनरेगा की दिहाड़ी में कथित तौर पर हेराफेरी का होना सामान्य सी बात है। कोटद्वार नगर निगम में यदि प्रस्तावित पूरा ग्रामीण क्षेत्र आता है तो यहाँ के ग्रामीण इससे बुरी तरह प्रभावित होंगे। केंद्र सरकार की ग्रामीण परिवेश को केंद्रित लोकप्रिय योजना मनरेगा जेसे सीधे बन्द हो जायेगी। ग्रामीण विकास को समर्पित राज्य का 14वा वित्त भी बन्द हो सकता है। इतना ही नहीं मकान के नक्शे बनाने से लेकर जीवन पर्यन्त तक टैक्सों की भरमार को ये ग्रामीण समझ भी नही पाएंगे और आये दिन आपसी झगड़ों का झंझट अलग से बढ़ता रहेगा। जब ये किसान और कास्तकार ग्रामीण परिवेश बदलकर नगरीय व्यवस्था में आएंगे तो तब खेती के औजारों, दवाइयों , उपकरणों, लघु उद्योगों पर मिलने वाली सब्सिडी भी समाप्त हो जायेगी। लगभग 4253 हेक्टेयर में फैले और लगभग 150 वर्ग किमी की क्षेत्रफल वाले इस प्रस्तावित नगर निगम जिसकी कुल आबादी लगभग 1लाख के करीब है के बनने से सर्वाधिक फायदा जमीनों के खरीद फरोख्त में लगे लोगो को होगा, जो कि काफी पहले से मन्दा पड़ा है। जमीनों के दाम बढ़ेंगे, सड़के, पीने के पानी, साफ सफाई, सिविर , स्ट्रीट लाइट ,आदि की व्यवस्था होगी। जबकि केंद्र सरकार की गरीबो को घर देने की योजना को चार चाँद लगेंगे और प्रत्येक गरीब को एक घर मिलेगा आदि आदि। पर इन सबके लिए आपको टेक्स देना होगा नगर निगम को। अब इस व्यवस्था को कितने लोग समझ पाते है और कितने नही फ़िलहाल यह कहना उचित नही है। जबकि जन नेता अपने अपने स्वार्थ को सीधा करने की फ़िराक में है।
नगर निगम को लेकर सत्ताधारी पार्टी का स्वर भी एकमत नहीं दिखाई दे रहा है। हालांकि स्थानीय प्रशासन और जिला प्रशासन की इस कवायद को राज्य की सरकार ने अमली जामा तो पहना दिया है, लेकिन कोटद्वार नगर पालिका के नगर निगम बनने के अचानक आये इस फैसले से लगभग सभी अचम्भे में है। कहते है कि जिला बनता तो रोजगार होता, खाली हाथों को काम मिलता, पौड़ी के चक्कर नही लगाने पड़ते , किरायदार बढ़ते और बढ़िया किराया मिलता। पर ये कौन समझाये कि नगर निगम से भी जीवन का स्तर ऊँचा होता है, एक स्टेंडर्ड बनता है.क्यों गरीब के गरीब रहना चाहते हो? हाथ बढ़ाओ और सरकार से मिलाओ जो तुम्हे ऊपर खींच कर लाना चाहती है।

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