सावधान! ध्यान दें कि कहीं आपका लाडला इंटरनेट पर आत्मघाती ब्लूह्वेल तो नहीं खेल रहा है

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सावधान!ध्यान दें कि कहीं आपका लाडला इंटरनेट पर आत्मघाती ब्लूह्वेल तो नहीं खेल रहा.
लेख-नागेन्द्र प्रसाद रतूड़ी
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आज के इस आर्थिक युग में हम धन कमाने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि हम अपने बच्चों की ओर ध्यान देने का समय नहीं निकाल पाते.उन्हें कीमती इलेक्ट्रानिक उपकरण देकर महंगी बाईक देकर समझ लेते हैं कि हमने अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली.
बच्चों की देखभाल न कर पाने पर बहुधा वे बुरी संगति में पड़ जाते हैं अनेक प्रकार के नशे व अन्य बुराइयां उन्हें पतन के गर्त में धकेल देती हैं. आज की इंटरनेट की दुनिया लोगों को अंतर्मुखी बनाती जाती है. इंटरनेट में जहां अनेक ज्ञान की बातें होती हैं वहीं उसमें बुराई की बातें भी बहुत होती हैं. मनुष्य की विशेषकर किशोर अवस्था में बुराइयों की ओर जाने की प्रवृति होती है.क्यों कि इस अवस्था में वह कल्पना की दुनिया में रहता है. इंटरनेट की समान्य बुराइयों को तो सुधारा जा सकता है पर अब इन्टरनेट पर ऐसे गेम भी आने लगे हैं जो किशोर मन को मौत की ओर धकेल रहा है. चीन की एक वेबसाईट पर मानव कढाई के नाम से ऐसा ही गेम है. पर इन सबसे अधिक खतरनाक गेम है रूस का ब्लूह्वेल. जिसके कारण दुनिया में 200 से अधिक मौतें दुनिया में हो चुकी हैं.समाचारों के अनुसार इसका आगमन भारत में भी हो चुका है. और कुछ मौतों को इस खेल से जोड़ा जा रहा है.
अगर अभिभावकों ने अपने बच्चों पर ध्यान नहीं दिया तो मौत का दूत यह खेल भारत के बच्चों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसके लिए अपने बच्चों को रोज समय देना जरूरी है.उनके व्यवहार में निराशा जनक व अवसाद की बातें देख कर उनको प्यार से पूछिए .न हो तो मनोवैज्ञानिक से मिलाइए.
याद रखिए अगर आपके बच्चे ने ब्लू ह्वेल खेलना प्रारंभ कर दिया तो समझ लीजिए कि अगर आपने उसकी प्रेम व सहानुभूति से मदद नहीं की तो खेल का हर जीतता चरण उसे आत्महत्या की ओर ले जाएगा.इसलिए अपने बच्चों के प्रति सावधानी बरतना बहुत आवश्यक हो गया है. तथा सरकार को भी ऐसी साईटों को प्रतिबंधित करना चाहिए. यह सब बहुत सावधानी से होना चाहिए.
आखिर इस खेल में ऐसा क्या है कि जो इसे खेलता है उसे आत्महत्या करने को विवश होना पड़ता है. वस्तुत: यह खेल पचास भुजाओं वाले आक्टोपस जैसा(पचास चरणों वाला) है जो प्रतिदिन अपनी एक-एक भुजा खिलाड़ी के शरीर पर गढाता है.
इस खेल का उद्देश्य और संरचना ऐसी की गयी है कि खिलाड़ी का दिमाग धीरे धीरे ऐडमिन के अनुसार चलने लगता है और एक दिन वह एडमिन के बस में हो जाता है और खेल की अंतिम चुनौती और विजेता बनने की अंतिम शर्त आत्महत्या है. पचास चरणों के इस खेल में उनचास चरण जीत कर हारना किसी भी किशोर को पसंद नहीं होता है.इसलिए विजेता कहलाने के लिए वह अपनी जान देने में नहीं चूकता.
रूस के 25 वर्षीय फिलिप बुडेकिन ने सन् 2013 में रूस की सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साईट पर एक ऑनलाईन गेम बनाया जिसे नाम दिया ब्लू ह्वेल, इस गेम के पचास चरण हैं और इसका अन्तिम चरण खेलने वाले बच्चे को आत्महत्या करने को मजबूर कर देता है.जानकारी के अनुसार इस गेम की आहट भारत में भी हो चुकी है. इस गेम के कारण अभी तक संसार में लगभग 200 किशोरों व युवाओं को आत्महत्या करनी पड़ी.
इस खेल में आत्महत्या का पहला मामला 1915 में रूस में आया जब एक युवा ने इस गेम के कारण आत्महत्या की. एक पत्रकार की छानबीन से यह पता चला कि ब्लूह्वेल नामक यह खेल उस युवा की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार है.जिसके कारण फिलिप बुडिकेन को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के अपराध में जेल की सजा हो गयी है. आंकड़ों के अनुसार 2015 से 2016 के बीच लगभग सवा सौ लोगों ने आत्म हत्या की है.
सोशल मीडिया के माध्यम से बच्चों तक पहुंचने वाले इस गेम के खेलने वाले को हर रोज एक कोड नं. दिया जाता है, ये कोड भयानक दृश्यों से जुड़े होते में शुरू में हॉरर फिल्मों को देखने की चुनौती दी जाती है. हर चुनौती के बाद रोज ब्लेड से हाथ पर चीरा मार कर ऐडमिन को भेजनी होती है इन कटों से एक दिन ह्वेल की आकृति उभारनी होती है. उसके बाद चीरा देकर हाथ में F57 लिखवा कर उसकी फोटो खींच कर अपलोड करने को कहा जाता है. इस गेम का ऐडमिन स्काइप के माध्यम से खिलाड़ी से बात करता रहता है.इन चुनौतियों से ऐडमिन घीरे घीरे खिलाड़ी के मस्तिष्क पर अपना अधिकार जमाता जाता है. बाद में तीन नसें काटने और चाकू या ब्लेड से यस गोदने को कहता है जो नही गोद पाता उसे सजा के रूप में अपने शरीर में कई कट लगाने पड़ते हैं इस प्रकार उनचास चुनौती पूरा करने के तक खिलाड़ी का दिमाग पूरी तरह एडमिन के कब्जे में आ जाता है. कहा जाता है कि इस खेल को आधे में छोड़ने पर अनेक धमकियां दी जाती हैं जिससे उसे मजबूरी में खेल जारी रखना पड़ता है और पचासवें दिन ऐडमिन खिलाड़ी को कहता है कि अगर विजेता बनना है तो ऊंची छत से कूद कर आत्महत्या करनी होगी. ऐडमिन के द्वारा कब्जाए दिमाग के कारण खिलाड़ी यह नहीं समझ पाता कि ऐसी जीत का क्या लाभ जिसकी खुशी मनाने के लिए वही जिन्दा नहीं बचेगा और वह ऊंची छत से कूदने से पहले अपनी सेल्फी ऐडमिन को भेजता है और छत से कूद कर आत्महत्या कर देता है.
अगर समय रहते अपने बच्चों को प्यार नहीं दिया गया उन्हें समय नहीं दिया गया तो किशोर बच्चे इस जंजाल में फंस सकते हैंं. इसलिए समय रहते इस मौत के जाल से अपने लाडलों को निकालना जरूरी है

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